सहारा को राहत, निवेशकों को पैसा लौटाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाडिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सहारा समूह की दो कंपनियों से कहा गया है कि वे विस्तृत हलफनामा देकर बतायें कि उन 2.3 करोड़ निवेशकों के हितों की रक्षा कैसे करेंगी जिन्होंने अपना पैसा सहारा इंडिया रीयल इस्टेट कारपोरेशन (अब सहारा कमोडिटी सर्विसेज कारपोरेशन) तथा सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कारपोरेशन में लगाया है। न्यायालय ने इन कंपनियों से कहा है कि वे वित्त वर्ष 2011 के लिए अपनी बैलेंस शीट तथा नवंबर 2011 के अपने खातों का ब्यौरा (स्टेटमेंट) 8 जनवरी तक उपलब्ध कराए।
इस दिन मामले की अगली सुनवाई होगी। खंडपीठ ने कहा, हलफनामे में कंपनियों की निवल संपत्ति, विशेषकर उन सम्पत्तियों का ब्यौरा होना चाहिए जिनके आधार पर धन लिया गया है,। इसके अलावा न्यायालय ने कंपनियों को उनके खातों का नंवबर 2011 तक का ब्यौरा व 2010-11 की बैलेंस शीट भी मांगी है। कंपनियों से कहा गया है कि वे हलफनामें में यह भी बताएं कि वे अपने निवेशकों के हितों की रक्षा कैसे करेंगी।












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