दिल्‍ली: पर्सनल लोन के नाम पर 2 लाख की ठगी

Two lakhs swindle in the name of personal loan
दिल्ली ( ब्यूरो) । ठगों ने पर्सनल लोन देने का झांसा देकर हैदराबाद के एक अस्पताल कर्मी से दो लाख रुपये ठग लिए । लोन देने वाली कंपनी ने नोएडा के एक प्लॉट का पता देकर हैदराबाद के अखबार में विज्ञापन दिया था। ठगी का शिकार अस्पताल कर्मी ने नोएडा के थाना सेक्टर-20 में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई है। भवानी नगर हैदराबाद निवासी सईद जौहीबुद्दीन हैदराबाद के चांदगंज स्थित अशोक अस्पताल में काम करता है। उसने 15 अगस्त के अखबार में एशियन फाइनेंस कंपनी प्लॉट नंबर 190 सेक्टर-6 नोएडा का विज्ञापन देखा। जिसमें सस्ते ब्याज पर लोन देने की बात लिखी थी।

विज्ञापन पर दिए गए फोन नंबर पर सईद ने बात की तो मनोज दिवाकर नामक व्यक्ति ने लोन देने की बात कहते हुए रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में पीएनबी बैंक में यश कुमार के अकाउंट नंबर 3714000110020076 में ढाई हजार रुपये जमा करने के लिए कहा। सईद ने रुपये जमा कर दिए। इसके बाद दिवाकर ने फोन कर कहा कि कंपनी का वकील अशोक सब्बरवाल आप से बात करेंगे जिन्हें आप कानूनी कार्रवाई के लिए दस्तावेज उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद अशोक ने बात की तो सईद ने पर्सनल लोन के रूप में दो लाख रुपये की बात की।

वकील अशोक ने तीन लाख रुपये लोन दिलाने का वादा किया और फिर एक नय अकाउंट नंबर देकर एडवांस के रूप में दो लाख रुपये जमा करने के लिए कहा। आश्वासन दिया कि यह पैसे आपके खाते में वापस तीन लाख रुपये के साथ मिल जाएंगे। वह उनकी बातों में आ गया और उसने दो लाख रुपये जमा कर दिए। इसके कुछ दिन बाद अरविंद शर्मा ने लोन पास करने की जानकारी दी और एक लेटर भी मेल किया। इसके बाद उसने दस हजार रुपये और जमा करने की बात की नहीं तो लोन कैंसल करने की बात कही।

लोन कैंसल करने की बात सुनकर दस हजार रुपये भी जमा कर दिए। इसके बाद भी लोन नहीं मिला तो वह नोएडा आकर कंपनी के पते पर पहुंचे तो वहां उस पते का प्लॉट ही नहीं था। फर्जीवाड़े का अहसास होते ही सईद ने एसएसपी से मुलाकात कर घटना की जानकारी दी। एसएसपी के आदेश पर थाना सेक्टर-20 पुलिस ने मामला दर्ज कर ठगों की तलाश का दावा किया है। एनसीआर में सक्रिय ठग मोबाइल कंपनियों के टावर लगाने के नाम पर मोटी कमाई तो कभी सस्ते ब्याज दर पर लोन या कभी बड़े मंत्रालय या कंपनी में ऊंचे पद पर नौकरी दिलाने का विज्ञापन दक्षिण भारत के अखबारों में प्रकाशित कराते हैं।

वहीं इंटरनेट पर भी अपनी फर्जी वेबसाइट बनाकर उस पर भी नौकरी, लोन और कमाई का विज्ञापन देते हैं। ऐसे में लोग जांच पड़ताल करने के बजाए दिए गए फोन नंबर पर संपर्क कर बातचीत करता है। फोन करते ही ठग सक्रिय हो जाते हैं और आपको अपनी बातों में ऐसा उलझा देते हैं कि आप चाह कर भी उन पर शक नहीं कर सकते और उनकी बातों में आकर अपनी गाढ़ी कमाई का कुछ अंश उनके बैंक खाते में डाल देते हैं।

रकम आते ही चंद मिनटों बाद ही नेट बैंकिंग से रकम निकाल ली जाती है। इसके बाद आप उनसे दुबारा संपर्क करें तो फोन नहीं मिलेगा या फिर अभद्रता से बातचीत होगी। ठगी का शिकार होने वाले नोएडा या दिल्ली आने से हिचकते हैं और डूबी गई रकम को भूल जाते हैं। इसी के चलते ठगो का धंधा फल फूल रहा है।

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