वालमार्ट, केयरफोर, टेस्को के मार्ट खुलेंगे, कैबिनेट ने दे दी मंजूरी

Wal Mart
दिल्ली(ब्यूरो) जल्द ही वालमार्ट, केयरफोर, टेस्को आदि के चमचाते मेगा मार्ट भारत के सभी बड़े शहरों में नजर आएंगे। सरकार ने साफ कर दिया है कि ये मार्ट दस लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में ही बनेंगे। संभावना है कि मेगा मार्ट में सबसे पहले वालमार्ट का भारत में प्रवेश होगा। यूपीए के सबसे बड़े घटक तृणमूल कांग्रेस और लगभग पूरे विपक्ष के जबरदस्त विरोध को दरकिनार करते हुए सरकार ने बृहस्पतिवार रात मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में 51 फीसदी विदेशी निवेश का रास्ता खोलने का फैसला कर लिया। इसके साथ ही सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल क्षेत्र में मौजूदा 51 फीसदी विदेशी निवेश की सीमा भी बढ़ाकर सौ फीसदी करने पर कैबिनेट में मुहर लगा दी है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में कैबिनेट की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के नेता और रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने ममता बनर्जी के निर्देश पर विरोध का झंडा जरूर उठाया लेकिन कैबिनेट ने इसके बावजूद मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में विदेशी मेगामार्ट कंपनियों के आने का रास्ता खोलने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा सरकार के इस फैसले का शुक्रवार को संसद में औपचारिक बयान देकर ऐलान करेंगे। विरोध का झंडा उठा रही विपक्षी पार्टियों ने कैबिनेट के इस फैसले का संसद से सड़क तक जबरदस्त विरोध करने का ऐलान कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री निवास सात रेसकोर्स रोड पर देर शाम हुई कैबिनेट की बहुचर्चित इस बैठक में ममता बनर्जी के आदेश का पालन करते हुए त्रिवेदी ने विरोध जरूर किया मगर अंतत: कैबिनेट ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध को थामने के लिए कैबिनेट की बैठक से पहले उनको मनाने का जिम्मा वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा को सौंपा गया। शर्मा ने ममता से इस बारे में चर्चा भी की मगर उनको कामयाबी नहीं मिली और दिनेश त्रिवेदी ने साफ कहा कि कैबिनेट में वे इसका विरोध करेंगे।

इस फैसले के बाद देशी खुदरा बाजार के कारोबारियों के व्यवसाय पर संकट के बादल छाने की आशंका राजनीतिक दल जता रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ अब देश में दुनिया भर के सबसे बड़े मेगामार्ट मसलन वालमार्ट, केयरफोर, टेस्को आदि के चमचाते मार्ट भारत में आएंगे। कैबिनेट ने मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में एफडीआई को अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी है। इसके तहत दस लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में ही बहुराष्ट्रीय रिटेल कंपनियों को मेगामार्ट खोलने की अनुमति दी जाएगी। इसमें विदेशी कंपनी को कम से कम 500 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। ताकि छोटे शहरों में इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ सके। कंपनियों को निवेश का 50 फीसदी हिस्सा खुदरा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के विकास और वेयरहाउसिंग आदि पर खर्च करना होगा। साथ ही कृषि उत्पादों को खरीदने का पहला हक सरकार को होगा।

रिटेल क्षेत्र में विदेशी निवेश का दरवाजा खोलने के प्रस्ताव पर विपक्षी पार्टियों ने सरकार को संसद से सड़क तक घेरने का ऐलान करते हुए कहा है कि यह देश के छोटे और खुदरा कारोबार से गुजर बसर करने वाले चार करोड़ लोगों के साथ धोखा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के आने से भी ज्यादा बड़ा खतरनाक फैसला बताते हुए इससे संबंधित बिल का संसद में विरोध करने का ऐलान किया। वहीं वामपंथी पार्टियों ने प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए कहा है कि यह आम आदमी की पेट पर लात मारने जैसा फैसला है। वहीं समाजवादी पार्टी के मोहन सिंह ने कहा कि कैबिनेट के इस फैसले के विरोध में उनकी पार्टी लोगों को लेकर सड़क पर उतरेगी। हालांकि इसके पक्ष लेनेवाले कहते हैं कि वालमार्ट के आने से महंगाई घटेगी। क्योंकि हर कोई जानता है कि महंगाई की सबसे बड़ी वजह ब्रोकर हैं। किसान से माल उपभोक्ता के पास आते -आते दो गुना महंगा हो जाता है। वालमार्ट जैसे मेगा मार्ट से यह अंतर कम हो जाएगा।

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