हंगामे की भेंट चढ़ रहा संसद का शी‍तकालीन सत्र

Parliament
दिल्‍ली। मानसून सत्र की तरह संसद का शीतकालीन सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां यूपीए सरकार को अन्‍ना हजारे ने इसी सत्र में लोकपाल बिल पारित करने का अल्‍टीमेटम दे रखा है वहीं अभी इस बिल पर कोई चर्चा ही नहीं हो पाई है। यूपीए सरकार और विपक्षी पार्टियों की जिद की वजह से कोई भी बिल अभी तक पेश ही नहीं हो पाया है। एनडीए और लेफ्ट ने पहले दिन से ही संसद स्‍थगन का प्रस्‍ताव संसद में पेश किया है। महंगाई और काले धन पर भारी हंगामा हुआ है जिसने संसद की कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ने दिया है।

पहले 2 दिन बार-बार दोनों सदनों की कार्रवाई स्‍थगित होती रही। तीसरे दिन भी यही आलम रहा। एनडीए की प्रमुख पार्टी जहां काले धन पर बहस चाहती थी वहीं लेफ्ट ने महंगाई के मुद्दे पर बहस की मांग करते हुए संसद स्‍थगन का प्रस्‍ताव दे डाला। जिसके बाद महंगाई, अलग तेलंगाना राज्य और ओडि़शा को विशेष राज्य का दर्जा देने जैसे मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के हंगामे के कारण लोकसभा में लगातार तीसरे दिन भी प्रश्नकाल नहीं चला और कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

गौरतलब है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने काले धन के मुद्दे पर कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया है। लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से अपने स्थान पर जाने और प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह किया लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। शोर शराबा थमता नहीं देख उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। अब ऐसे में देखना है कि प्रश्‍नकाल न होने और संसद की कार्रवाई स्‍थगित होने की स्थिति में कई महत्‍वपूर्ण बिल कैसे पास हो सकेंगे। संसद की कार्रवाई देखकर लग रहा है कि यह सांसदों के दंगल की जगह बन गया है।

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