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नंदनगरी किन्‍नर हादसाः सरकार किसे दे मुआवजा

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Relief to Delhi fire victims unlikely
दिल्ली(ब्यूरो)। नंदनगरी हादसे में घायल और मृत किन्नरों के मुआवजे पर असमंजस के हालात बन गए है। सरकार किसे मुआवजा दे समझ नहीं पा रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून पीड़ित परिवार को ही मुआवजा दी जाएगी। इस बीच हादसे में मरनेवालों की संख्या बढ़ कर 18 पहुंच गई है। समाज के प्रमुख सदस्यों का कहना है कि समाज में दाखिल होने के बाद किन्नर उसका सदस्य बन जाता है। फिर मुआवजा परिजनों के सौंपने का कोई मतलब नहीं बनता।किन्नरों का कहना है कि किन्नर बनते ही घर से नाता टूट जाता है। यह हर कोई जानता है।

बता दें कि दिल्ली सरकार ने नंद नगरी अग्निकांड में मारे गए किन्नरों के परिजनों के लिए दो लाख, गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार और मामूली रूप से घायलों को पांच हजार रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। घायलों के मामले में कोई समस्या नहीं है। वह खुद आगे आकर मुआवजा ले सकते हैं। असल दिक्कत मृतकों के मामले में आएगी। अधिकारियों और किन्नर समाज के बीच इस पर अलग-अलग राय है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे में मृत किन्नरों का मुआवजा लेने के लिए उनके परिजनों को सामने आना होगा। उत्तर-पूर्वी जिले का अतिरिक्त प्रभार देख रहे उपायुक्त राजेश मिश्रा का कहना है कि दावेदारों को मृतक के साथ अपने संबंध का कानूनी रूप से मान्य दस्तावेज पेश करना होगा। तभी मुआवजे की राशि दावेदारों को दी जाएगी। वरीयता मृतकों के परिजनों को दी जाएगी।

अगर किसी का परिजन सामने नहीं आता तो कानूनी दस्तावेज मुहैया कराने वाले को मुआवजा दिया जाएगा। दूसरी ओर किन्नर समाज की राय इससे अलग है। उनका कहना है कि किन्नरों का पारिवारिक रिकार्ड मिलना मुश्किल है। वजह यह है कि ज्यादातर किन्नर काफी कम उम्र में अपना परिवार छोड़ देते हैं। इस संबंध में सागर, मध्य प्रदेश नगर निगम की महापौर कमला बुला के मुताबिक हमारा कोई पारिवारिक रिकार्ड नहीं होता। हमारे लिए गुरु-चेला परंपरा ही अहमियत रखती है। इस आधार पर मुआवजा गुरु-चेले को ही मिलना चाहिए। वही एक-दूसरे के कानूनी वारिस होते हैं। गुरू की मृत्यु की हालत में प्रमुख चेले को और चेले की मृत्यु की पर उसके गुरु को मुआवजा मिलना चाहिए। वहीं सम्मेलन की आयोजक नूरी हाजी नायक का कहना है कि कानूनी दस्तावेज के रूप में हमारे पास वोटर आई कार्ड होता है। इसके लिए हमारे निवास स्थान की शिनाख्त की जा सकती है। इससे इस संबंध में कोई दिक्कत नहीं होगी।

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English summary
Even though the Delhi government has announced a compensation of Rs 2 lakhs to the "next of kin" of the 15 eunuchs who died in a fire in a community center in Nand Nagri area of east Delhi on Sunday, it is very likely that government may end up paying nothing as per government policy.
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