गुडग़ांव: अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारी ने खुद को मारे जूते

Haryana Police
गुडग़ांव। अतिक्रमण का विरोध कर रहे लोगों के आरोपों से क्षुब्ध हुडा प्रशासक डा. प्रवीन कुमार ने जूता निकाला और अपने सिर पर मारने लगे। यह एक ऐसा अप्रत्याशित वाकया था, जिसे देखकर अतिक्रमण हटाने का विरोध करने वाले सन्न थे।

प्रशासक डॉ. प्रवीण कुमार के जवाब का लब्बोलुआब था-अतिक्रमण हटाने के लिए कुछ भी करेगा। गुडग़ांव के सिकंदरपुर और ब्रिस्टल चौक के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुडा के प्रशासक डॉ. प्रवीण कुमार को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बड़े बुजुर्गो की गालियां सुननी पड़ी, लोगों के पैर तक पकडऩे पड़े। वे किसी हालत में सड़क को अतिक्रमण से मुक्त कराना चाहते थे।

कार्रवाई के दौरान भीड़ से आवाज आई, प्रशासक को जूते मारो। जवाब में डॉ. कुमार ने कहा- मुझे जूते मारने की जरूरत नहीं। मैं खुद ही अपने सिर पर जूते मार लेता हूं। उन्होंने अपने सिर पर जूते मार लिए। बकौल डॉ. कुमार-लोग मुझे पागल समझें या ईमानदार। अतिक्रमण हर हाल में हटेगा। उन्होंने रविवार रात फुटपाथ पर बिताई।

यहां तक कि उनकी पत्नी और बेटी को उनका हालचाल जानने के लिए फोन घुमाना पड़ा। बाद में जब हुडा प्रशासक से पूछा गया कि उन्होंने अपने सिर पर जूते क्यों मारे तो उनका कहना था-ये विरोध करने वालों को समझाने का तरीका भर है। हुडा का दस्ता अवैध निर्माण को तोडऩे की कार्रवाई कर रहा है। हुडा प्रशासक डा. प्रवीन कुमार भी मौजूद हैं। उनके साथ अथारिटी के कुछ और सीनियर अधिकारी मौजूद हैं। इस दौरान वहां के लोग विरोध पर उतर आते हैं।

डा.प्रवीन कुमार समझाते हैं। लेकिन लोग उन्हीं पर आरोप लगाने लगते हैं कि आप डीएलएफ के बिल्डरों से पैसे लेकर हमारे मकान तोड़ रहे हैं। इस पर हुडा प्रशासक जवाब देते हैं-अगर मैंने पैसे लिए हैं तो आप लोग जूते निकालिए और मेरे सिर पर मारिए। और फिर वह जो करते हैं उससे वहां मौजूद लोग दंग रह जाते हैं। वह खुद अपने पैर से जूता निकालते हैं और अपने सिर पर मारने लगते हैं।

उसके बाद उनके अधीनस्थ अधिकारी उन्हें पकड़ लेते हैं। दरअसल, ब्रिस्टल चौक से सिकंदरपुर मेट्रो स्टेशन तक अवैध कब्जों को हुडा प्रशासक के नेतृत्व में तोड़ा जा रहा था। लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। जब लोगों को जानकारी हुई कि हुडा प्रशासक ने ही अभियान की कमान संभाल रखी है तो रात करीब 10.30 बजे कुछ महिलाओं और पुरुषों ने उनको घेर लिया और बिल्डरों से पैसा लेने का आरोप लगा कर गलियां देने लगे। हुडा प्रशासक ने हाथ जोड़कर लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन जब लोग नहीं माने तो वह गांधीगिरी पर उतर आए। इसके बाद तोडफ़ोड़ का विरोध करने वालों की भीड़ छंट गई।

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