यूपी के चार टुकड़े कर केंद्र तक पहुंचने की जुगत में मायावती

Mayawati making ladder for Centre by dividing Uttar Pradesh
लखनऊ (अंकुर कुमार श्रीवास्‍तव)। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्‍यमंत्री मायावती ने जो सियासी कार्ड खेला है, फिलहाल उसपर अमल हो ना हो मगर राजनीतिक गलियारे में सरगर्मी तेज हो गई है। राज्‍य स्‍तरीय दलों सहित केंद्र में राज कर रही कांग्रेस और मुख्‍य विपक्षी दल भाजपा भी मजबूरी में माया के इस प्रस्‍ताव के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। मायावती ने यूपी को बांट कर चार राज्‍यों पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश बनाने की वकालत की है।

अब अगर यूपी को विभाजित कर बनने वाले चार नये राज्‍यों के राजनीतिक समीकरण पर चर्चा करें तो जो भी नये राज्‍य होंगे उनमें बसपा की सीटें अन्‍य पार्टियों से कहीं ज्‍यादा हैं। अलग होने के बाद उन चार राज्‍यों में चुनाव होने पर बसपा बढ़त में रहेंगी। यानी चारों नये राज्‍यों की सत्‍ता पर बसपा काबिज हो सकती है। ऐसे में एक और संभावना है कि माया इन राज्‍यों में अपने नुमाइंदों को बैठाकर खुद 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिये सीढ़ी तैयार कर रही हों।

आखिर क्‍या वजह है कि माया के एक वार से ही सभी राजनीतिक दल बैकफुट पर आ गये। दरअसल यह प्रस्‍ताव माया का नहीं बल्कि जनता की मांग है। मायावती इस प्रस्‍ताव को साढ़े चार सालों से रोक कर चुनाव से ठीक पहले पेश करने की जुगत में थी। तमाम स्‍थानीय दल जैसे कि अजीत सिंह की रालोद और कल्‍याण की जनक्रांति सहित तमाम पार्टियां बंटवारे के इस प्रस्‍ताव पर ही राजनीति कर रही थी। अब ये पार्टियां माया के इस प्रस्‍ताव का विरोध करने के बजाये सीधे उनका दामन थाम लिया है।

यूपी में सत्‍ता में वापसी की छटपटाहट में बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा जनता की भावनाओं को भांपते हुए माया के समर्थन में आ खड़े हुए हैं। माया के इस प्रस्‍ताव का समर्थन करना भाजपा की मजबूरी बन गई है। भाजपा ने इससे पहले यूपी से तोड़कर उत्‍तराचंल को अलग किया था, जो बाद में उत्‍तराखंड बना। बीजेपी ने उस समय भी राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से ही यूपी से निकाल नया राज्‍य बनाया था जहां आज भी वहीं काबिज है। दूसरी तरफ कांग्रेस तेलंगाना को भले ही अलग राज्‍य बनाने की मंजूरी ना दे रही हो, लेकिन यूपी में वह माया से सहमत नजर आ रही है।

कांग्रेस को भी पता है कि वह इतने बड़े राज्‍य में वापसी नहीं कर पायेगी, जिसका इंतजार उसे पिछले 22 साल से है। चाह कर भी कांग्रेस माया के दलित वोट बैंक पर डाका नहीं डाल पाई है। अब बंटवारे के बाद भौगोलिक स्‍तर पर हुए बदलाव का फायदा मिलने की उम्‍मीद कांग्रेस भी इस प्रस्‍ताव से लगाए बैठी होगी। इतना ही नहीं कांग्रेस हमेशा से कहती रही है कि अगर राज्‍य सरकार से यूपी को बांटने का प्रस्‍ताव आता है तो वह उसका समर्थन करेगी। अब चुनावों से ठीक पहले वह अपने वायदे से मुकर जनता का विरोध नहीं झेलना चाहती।

मायावती के इस एलान के समय प्रस्‍तावित राज्यों में विभिन्‍न राजनीतिक दलों का राजनीतिक समीकरण कुछ ऐसा है-

राज्‍य सीटें बसपा कांग्रेस भाजपा सपा अन्‍य
पूर्वांचल 187 102 12 20 47 06
अवध प्रदेश 79 43 03 09 23 01
बुंदेलखंड 21 15 02 00 04 00
पश्चिम प्रदेश
116 61 03 19 14 19


(नोट: अन्‍य राजनीतिक पार्टियों में रालोद, जनक्रांति व निर्दलीय शामिल हैं।)

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