यूपी का बंटवाराः मायावती की सियासी चाल से विपक्षी पस्त

माया सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा, पार्टी किसी एक चुनाव या तात्कालिक फायदे के लिए फैसले नहीं करती। यह बहुत संवेदनशील मामला है। उत्तर प्रदेश का अपना एक स्वर्णिम इतिहास है। लिहाजा इस तरह का फैसला सोच-समझकर, गंभीर विचार-विमर्श के बाद लेना चाहिए। गौरतलब है कि मायावती इस मसले पर पूर्व में प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख चुकी है। कांग्रेस तब बचाव में कहती रही है कि मायावती गंभीर हैं तो उन्हें इस पर विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजना चाहिए।
वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, ऐसे फैसले मायावती के चुनावी स्टंट हैं। इतने दिनों तक प्रदेश विभाजन के लिए न तो अध्ययन हुआ और न ही कोई समीक्षा। राज्य ऐसे नहीं बनते। इस प्रस्ताव के समर्थन या विरोध पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल तो तेलंगाना के गठन की मांग हुई है और उस पर केंद्र को फैसला लेना है। यूपी पर जब विधानसभा में प्रस्ताव आएगा, तब चर्चा करेंगे। रालोद के मुखिया चौधरी अजित सिंह ने कहा, यदि उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर मायावती गंभीर हैं तो इस फैसले में इतनी देरी क्यों हुई? इसके पीछे उनकी चुनावी फायदे की मंशा छिपी है।
फिर भी, रालोद शुरू से ही छोटे राज्यों के गठन का समर्थन करता रहा है, लिहाजा वह उत्तर प्रदेश के विकास के लिए इसके पक्ष में है। लोकमंच पार्टी के अध्यक्ष अमर सिंह ने मायावती के इस फैसले के लिए उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा,प्रदेश बंटवारे पर मायावती सरकार का प्रस्ताव पारित करना चार राज्यों के गठन के विधायी प्रक्रिया का पहला पड़ाव है। अब केंद्र सरकार तत्काल उस पर काम नहीं करती तो राजनीतिक ठीकरा उसके सिर फूटेगा। वहीं भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने इसके लिए अगल प्राधिकरण बनाने की मांग की।












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