राहुल का मिशन यूपी: 22 साल, 22 सीटें और चुनौती 202

राहुल गांधी पर इस समय कांग्रेस को यूपी में स्थापित करने की बड़ी चुनौती है। कांग्रेस की सरकार गए यूपी में 22 साल हो गए हैं। पिछली बार राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में जमकर पसीना बहाया था। जिसके बावजूद राहुल कांग्रेस की वापसी यूपी में करा नहीं पाए थे। जिस वजह से इस बार राहुल गांधी ने अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है। इस बार कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में फिर से स्थापित करने के लिए उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का सहारा लिया है।
कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में इस समय हालत अच्छी नहीं हैं। उसके पास इस समय केवल 22 सीटें हैं। राहुल गांधी के सामने चुनौती है इन 22 सीटों को सरकार बनाने के लिए 202 सीटों में बदलने की। जिसके लिए वे नेहरू-गांधी कनेक्शन का सहारा लने की जुगत में लगे हुए हैं। पंडित नेहरू के समय में फूलपुर के साथ-साथ पूरे यूपी में कांग्रेस की ज्यादातर सीटें सुरक्षित रहती थीं। दलित वोट बैंक पर बहुजन समाजवादी पार्टी ने डाका डाला तो कांग्रेस उसके बाद कभी प्रदेश में वापसी ही नहीं कर पाई।
विधानसभा में ही नहीं लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मुश्किल में रही है। राहुल गांधी अब मायावती दलित वोट बैंक को फिर से पार्टी की तरफ मोड़ने की कोशिश में इस बार यूपी अभियान पर निकले हैं। जिसके लिए उन्होंने दलितों को खुश करने के लिए उनके घर रातें गुजारी हैं और उनके घर खाना खाया है। उनकी इस चुनावी रणनीति से मायावती भी परेशान हो चुकी हैं। अब मायावती भी उत्तर प्रदेश में दलित सम्मेलन शुरू कर रही हैं। अब देखना है कि नेहरू की धरती से शुरू हुआ राहुल गांधी का यह सफर उन्हें लखनऊ तक का सफर तय करवा पाता है या नहीं।












Click it and Unblock the Notifications