आखिर कब तक मराठी राग से ठाकरे करेंगे सियासत!

राज ठाकरे ने यह धमकी उस संदर्भ में दी है जिसमें कृपाशंकर सिंह और अबू आजमी ने दो दिन पूर्व छठ पूजा आयोजन के समय कहा था कि 'मुम्बई किसी के बाप का नहीं है' बल्कि उन सभी लोगों का है जो यहां रहते और काम करते हैं।
मुंबई को लेकर यह झगड़ा पहली बार नहीं हो रहा है, बरसों पहले से यह लड़ाई चली आ रही है। कभी यहां उत्तर भारतीय कलाकारों को लेकर बवाल शुरू हो जाता है तो कभी उत्तर भारतीय ऑटो वालों को लेकर हिंसा होने लगती है। मराठी प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित फोर्थ क्लास है या वो लोग हैं जो दिहाड़ी पर जीता है। जिन्हें आये दिन मराठी दंश झेलना पड़ता है।
सबको पता है कि मुंबई नगरी में लाखों लोग रोजगार के लिए देश के विभिन्न इलाकों से आते हैं। लेकिन टारगेट हमेशा उत्तर भारतीयों को ही किया जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुंबई में रोजी-रोटी के लिए सबसे ज्यादा आने वाले यूपी-बिहार से ही हैं लेकिन स्वतंत्र भारत में कोई भी व्यक्ति कहीं भी जाकर बस सकता है।
सोचने वाली बात यह है कि जो लोग मराठा और मराठी को लेकर बवाल कर रहे हैं वो सियासी लोग हैं, जिनके लिए देश की समस्याएं मुद्दा नहीं होते, बल्कि ये जाति और क्षेत्र के नाम पर राजनीति खेल रहे हैं। देश को मराठाओं के नाम पर बांटने वाले यह लोग क्या देश और देश की तरक्की के बारे में सोचेगें। आखिर कब तक लोग क्षेत्रवाद के नाम पर सियासी खेल खेलते रहेगें?












Click it and Unblock the Notifications