ई-पेमेंट लाएगा नया सवेरा, घटेगा सरकारी खर्च

सरकार के कई विभागों में 20 तक अतिरिक्त कर्मचारी हैं। इससे दिन पर दिन राजस्व घाटा बढ़ता जा रहा है। लेकिन ई पेमेंट थोड़ी राहत की खबर ले कर आया है। इससे पहली बार 20 फीसदी तक सरकारी बाबूओं की संख्या कम हो सकती है। सरकार कर्मचारियों को हटा तो नहीं सकती लेकिन कहां उनका उपयोग कर सकती है। अनुमान है कि ईपेमेंट लागू होने पर 20 फीसदी क्लर्कों की जरुरत नहीं रहेगी। इससे सरकार को सालाना एक लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। हमें नहीं भूलना चाहिए कि ज्यादातर राज्य सरकारों का बजट का 90 फीसदी हिस्सा तो सरकारी कर्मचारियों के वेतन में ही चला जाता है। जाहिर है इसमें कहां से विकास होगा कहां से गरीबी दूर होगी।
यहीं नही केंद्र सरकार के कामकाज में ई-भुगतान सिस्टम लागू हो जाने के बाद दो करोड़ चेकों की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे केंद्रीय मंत्रालयों, प्रतिरक्षा और रेलवे विभाग द्वारा किया जा रहा 6 लाख करोड़ रुपए का भुगतान ऑनलाइन हो जाएगा। अभी रिजर्व बैंक ने इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ईसीएस), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) और रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) जैसी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियां चला रखी हैं। सरकार नकद-रहित लेन-देन का लक्ष्य हासिल करना चाहती है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के नियंत्रक लेखा परीक्षक (सीजीए) ने एक पूरी तरह से सुरक्षित सरकारी ई-भुगतान प्रणाली विकसित की है। इससे कोई भी
सरकारी भुगतान सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच जाएगा। सरकारी ई-भुगतान गेटवे एक पोर्टल है जिसके माध्यम से सुरक्षित तरीके से लाभार्थियों के खाते में ऑनलाइन भुगतान किया जा सकेगा। यह गेटवे कागज रहित लेन-देन, कारोबारी लागत को कम करने और नेट बैंकिंग को बढ़ावा देने की सुविधाओं के साथ कम्प्यूरीकृत भुगतान व लेखा अनुप्रयोग और भुगतान व लेखा कार्यालयों, कोर बैंकिंग समाधान के बीच कड़ी का काम करेगा।
यह प्रणाली उर्वरक, मिट्टी का तेल और रसोई गैस के उपभोक्ताओं को सीधे सब्सिडी देने के कामकाज में तेजी और पादर्शिता लाएगी। सरकार द्वारा घोषित उपायों में यह लक्ष्य पहले से ही शामिल है। इससे सभी केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों के लिए ऑनलाइन भुगतान में आसानी होगी और इसकी कुशलता से अन्य ई-सेवाओं के प्रयोग में भी वृद्धि होगी। ई-भुगतान प्रणाली से न सिर्फ समय की बचत होगी बल्कि चेकों की मैन्युअल प्रक्रिया से भी बचा जा सकेगा।
योजना यह है कि मार्च, 2013 से केंद्र सरकार के सभी मंत्रालय व विभागों से चेक बनाने का काम बंद हो जाएगा। केरोसीन, रसोई गैस और उर्वरक सब्सिडी का भुगतान सीधे जनता के बैंक खाते में डालने का काम तो अप्रैल, 2012 से ही शुरू हो जाएगा। इससे सरकार की सब्सिडी पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और इसके गलत इस्तेमाल का पता भी लगाया जा सकेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि चेक काटने से मुक्ति और एक लाख करोड़ की बचत से उम्मीद की जा सकती है कि देश के हालात में कुछ सुधार तो आएगा। सरकार को इसी तरह सरकारी खर्च घटाने वाली योजनाओं पर ध्यान रखने की जरूरत है। ईपेमेंट बेशक सराहनीय कदम है।












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