रियाल्टी सेक्टर को झटका, दिल्‍ली में घटेगी मकानों की डिमांड

Sheila Dikshit
दिल्ली (ब्यूरो)। शीला दीक्षित सरकार ने प्रस्तावित सर्किल रेट पर मुहर लगा दी है। इसके लागू होने पर दिल्ली में जमीन का न्यूनतम मूल्य 15,870 रुपये प्रति वर्ग मीटर और अधिकतम 2.15 लाख रुपये वर्ग मीटर तक हो जाएगा। दिल्ली में बिजली भी महंगी करने की तैयारी है। अब सर्किल रेट बढ़ने से आम आदमी जो मकान बनाने की सोच रहा था, वह इस दौड़ में और पिछड़ जाएगा। जाहिर है मकान अब महंगा हो जाएगा तो तय है कि डिमांड घट जाएगी। हैरत की बात यह है सर्किल रेट बढ़ाने में सामान्य नियमों को दरकिनार कर दिया गया है। हर साल बसों का किराया बढ़ता है। खाने पीने की चीजें महंगी होती जाती है। गैस महंगी होती जाती है, लेकिन इसके पीछे ठोस नियम होते हैं। खाने-पीने की चीजें में बढ़ोतरी हो या गैस में यह कभी भी 20 फीसदी से ज्यादा नहीं होती। यहां तो सरकारन पूरे 100 फीसदी तक बढ़ोतरी कर दी है।

बी, सी और डी श्रेणी में सर्किल रेट दोगुना कर दिया गया है। कहा जा रहा कि रेट बहुत कम था। वसंत कुंज, गोल्फ लिंक, सुंदर नगर, ग्रेटर कैलाश, आनंद लोक, ग्रीन पार्क, हौज खास और नेहरू प्लेस जैसी कालोनियों का सर्किल रेट 86 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 2.15 लाख रुपये कर दी गई है। मकान का धंधा वैसे भी कमजोर है। सरकार के इस फैसले इस पर और भी खराब असर पड़ेगा। मकान पर लोन पर ब्याज दर लगातार बढ़ती जा रही है। अब यह 11 फीसदी के करीब है। उस पर से सर्किल रेट में बढ़ोतरी मकान के सपने को और कठिन कर दिया है।

सरकार कह रही है कि चूंकि सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसले में पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर भूमि की खरीद-बिक्री को अमान्य कर दिया है। सर्किल रेट बढ़ाए जाने से जहां खरीद बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी, वहीं सरकार को होने वाला राजस्व का नुकसान भी घटेगा। हालांकि कुछ लोग सरकार के फैसले को सही बताते हैं। रियल्टी प्लस पत्रिका के सम्पादक विनोद बहल कहते है "सरकारी सर्किल रेट और वास्तविक कीमत अंतर काफी है। सरकार का फैसला सराहनीय है। लेकिन ध्यान देने की बात यह है यह अंतर दिल्ली में नहीं नोएडा और गुड़गांव में है। सरकार कह रही है अब मकान पर ज्यादा लोन मिल सकेगा। लेकिन यह कितना फायदेमंद है। यह तो सिर्फ आंकडों की बाजीगिरी है। मकान तो महंगा ही पड़ा। लोन ज्यादा मिले या कम इससे क्या फर्क पड़ता है। मुख्यमंत्री कहती है सर्किल रेट बढ़ने से दिल्ली नगर निगम की आय भी खुद-ब-खुद बढ़ जाएगी। नई दर के मुताबिक नगर निगम की कुल आय इस मद से 700 से 800 करोड़ रुपये हो सकती है। लेकिन आम आदमी कितनी मुसीबत में फंसेगा, उसका भी तो ख्याल रखने की जरूरत थी।

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