दीवाली पर अशुभ नहीं शुभ होता है उल्‍लू

Owl
आम तौर पर हिन्‍दू उल्‍लू को अशुभ और छछूंदर को गंदगी का प्रतीक मानते हैं। माना जाता है कि इन दोनों को देख लेने से दिन खराब हो जाता है। लेकिन दीवाली के दिन इन दोनों का काफी महत्‍व होता है। दीवाली के दिन अमावस्‍या की काली रात इन दोनों को देख लेना काफी शुभ होता है।

असल में उल्‍लू मां लक्ष्‍मी की सवारी होती है और माना जाता है कि इस दिन जिसके घर पर उल्‍लू आकर बैठ जाये, तो मानो मां लक्ष्‍मी खुद उस पर बैठ कर आयी हों। भारत की धर्मनगरी हरिद्वार में उल्‍लू की विशेष पूजा का आयोजन हर साल किया जाता है। यहां के धर्माचार्यों के मुताबिक उल्‍लू की पूजा के बगैर मां लक्ष्‍मी की पूजा अधूरी है।

लखनऊ के पंडित आचार्य राम जी मिश्र का कहना है कि यदि उल्‍लू की पूजा पूरे विधि-विधान से करते हैं, तो आपके घर में सुख समृद्धि आती है। इससे साल भर घर में लक्ष्‍मी आती हैं। लेकिन हां उल्‍लू की पूजा में किसी प्रकार का विघ्‍न नहीं होना चाहिये, इसलिए किसी विशेष विद्वान पंडित के द्वारा ही पूजन करवाना चाहिये।

अब अगर छछूंदर की बात करें तो यह भी काफी शुभ मानी जाती है। कहा जाता है कि छछूंदर दलुद्दर की निशानी होती है, लेकिन यदि दीवाली के शुभ अवसर पर आपने अच्‍छी तरह घर की साफ-सफाई की है, तो छछूंदर नहीं आती। लेकिन फिर भी अगर आ जाये, तो इसे शुभ माना जाता है। माना जाता है कि जो व्‍यक्ति दीवाली की रात छछूंदर देख ले, उसकी किसमत खुल जाती है।

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