आरटीआई की समीक्षा की जरूरत पर इसमें कोई ढ़ील नहीं: पीएम

Prime Minister Manmohan Singh
दिल्‍ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज स्पष्ट किया कि आरटीआई कानून में कोई ढील नहीं दी जाएगी और सरकार पारदर्शिता के लिए सूचना के अधिकार को और अधिक प्रभावी हथियार बनाना चाहती है। उन्‍होंने यह भी कहा कि सरकार कुछ चिंताओं पर ध्यान देने के लिहाज से उसकी गहन समीक्षा भी चाहती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आरटीआई कानून से सरकार की विचार विमर्श की प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए और ईमानदार लोक सेवक अपने विचार रखते समय हतोत्साहित नहीं होने चाहिए।

केंद्रीय सूचना आयोग के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन को संबोधित कर रहे सिंह ने कहा कि हम सूचना के अधिकार को प्रशासन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही लाने के लिए और भी अधिक प्रभावी हथियार बनाना चाहते हैं। पीएम ने बताया कि आरटीआई के अधिनियम की समीक्षा की जरूरत इसलिए है क्‍योंकि इसमें सबसे जरूरी है कि इस नियम से अधिकारी हतोउत्‍साहित नहीं होने चाहिए।

आरटीआई अधिनियम के तहत पिछले कुछ साल से कई बड़े घोटालों का खुलासा हुआ है। इन घोटालों में 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटालों में यूपीए सरकार के कई मंत्रियों की संदिग्‍ध भूमिका भी सामने आई थी। आरटीआई की वजह से ही यूपीए सरकार के प्रणव मुखर्जी और पी चिदंबरम आमने-सामने आ गए थे। इस मामले में पी चिदंबरम की भूमिका की अभी भी जांच चल रही है।

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