पीएम ने अन्ना को पत्र लिखा- कहा धीरज रखिये

सूत्रों ने बताया कि मनमोहन सिंह ने अन्ना को चिट्ठी लिखकर धीरज रखने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार लोकपाल ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए व्यापक एजेंडे पर काम कर रही है। चिट्ठी में अन्ना की राइट टू रिजेक्ट और चुनाव सुधारों के मुद्दे पर आम राय की बात कही गई है।
गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने कहा था कि अगर सरकार जन लोकपाल बिल को शीत कालीन सत्र में पारित कराने के बारे में लिखकर दे देती है तो वह कांग्रेस विरोध की अपनी अपील वापस ले लेंगे। यही बात टीम अन्ना के सहयोगी बार बार कहते रहे हैं।
अन्ना के पत्र के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि जो मुद्दे उन्होंने उठाए हैं, सरकार उस पर पहले ही काम कर रही है। सरकार एक सशक्त लोकपाल कानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उम्मीद है कि निकट भविष्य में वह इसमें सफल भी हो जाएगी। इतना ही नहीं, सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने और शासन में सुधार के व्यापक एजेंडे पर काम कर रही है। उसमें कई कानूनी, कार्यकारी और तकनीकी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। लोकपाल की स्थापना तो सरकार के इस एजेंडे का महज एक हिस्सा है।
बीते 21 सितंबर को प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में अन्ना ने चुनाव सुधारों की जरूरत पर बल दिया था। जवाब में प्रधानमंत्री ने उसमें से 'राइट टू रिजेक्ट' पर कहा है कि एक लोकतांत्रिक समाज में कुछ मुद्दों पर राजनीतिक सहमति जरूरी होती है। चुनाव सुधारों पर सरकार सभी दलों के साथ चर्चा करना चाहती है। उसमें जिन पर सहमति होगी, सरकार उन प्रस्तावों पर आगे बढ़ेगी।
उधर, आज केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकार शीत कालीन सत्र में लोकपाल बिल को पास करने के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार की कोशिश है कि राहुल गांधी के विचार के अनुसार इसे संवैधानिक दर्जा दिया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके तहत आधे सदस्य न्यायापालिका से होंगे जिससे इसके मूल रूप को हमेशा बरकरार रखा जा सके।












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