'मिर्ची' से डरने लगा है दाउद इब्राहिम

मिर्ची कैसे दाउद के लिये मुसिबत बन सकता है या फिर वह दाउद के कौन-कौन से राज खेलेगा इस पर चर्चा करने से पहले यह जानना जरुरी है कि मिर्ची आखिर है कौन और वह यहां तक पहुंचा कैसे? तो आपको बताते चलें कि एक समय में मसाला और मिर्ची बेचने वाला इकबाल मेमन आज दुनिया के 50 सबसे बड़े ड्रग्स स्प्लायर में शुमार है।
इकबाल का मिर्ची सौदागर से नशे का सौदागर बनने तक का सफरनामा
इकबाल मिर्ची का असली नाम मेमन इकबाल मोहम्मद है। उसके नाम के आगे मिर्ची इसलिए जुड़ा क्योंकि मुंबई के नल बाजार में उसकी मसालों और लाल मिर्ची के पाउडर की दुकान थी। इसके बाद ही वह दाउद के संबंध में आया और फिर 1980 में दाउद के इशारे पर ही उसने ड्रग्स की तस्करी शुरु कर दी। 1993 में मुंबई ब्लास्ट के बाद वह भारत से फरार हो गया। दुबई जाने के बाद उसने वहां ऐक्ट्रेस हिना कौसर से निकाह किया। उसके बाद से वह लंदन में ही रह रहा था और ड्रग्स के नेटवर्क को संचालित कर रहा था। वहां उसने खुद को चावल व्यापारी के तौर पर स्थापित किया था। मेमन हिंदी, अंग्रेजी और अरबी भाषा का बहुत अच्छा जानकार है।
80 के दशक के मध्य में इकबाल मेमन मादक पदार्थों की तस्करी में एक नामचीन शख्स बन गया और पूरी दुनिया में उसके तस्करी को लेकर उसके चर्चे होने लगे। दुनिया के कई मुल्कों की पुलिस उसकी तलाश कर रही थी और देखते ही देखते वह ड्रग्स की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया। उसके द्वारा भेजी गयी 80 लाख से अधिक मैंड्रेक्स गोलियों की खेप को जब मुंबई में जब्त किया गया था, तब उसमें भी मिर्ची का नाम ही आया था। मालूम हो कि मेमन की दौलत का अधिकांश हिस्सा रीयल एस्टेट कारोबार में लगा है।
इकबाल मिर्ची का भोपाल में दस करोड़ का बंगला
इकबाल का भोपाल की मशहूर श्यामला झील के किनारे एक बंगला है, जिसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रूपये बताई जाती है। इकबाल मिर्ची का भोपाल में दस करोड़ का बंगला अंग्रेजन बंगला के नाम से भोपाल के लोगों के बीच पहचान रखने वाला यह बंगला पिछले कई वर्षों से उजाड़ पड़ा है और आम आदमी इसके अंदर जाने से घबराता है। इस उजाड़ बंगले के खिड़की एवं दरवाजे तक टूट-फूट चुके हैं।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर फरार अपराधियों की सम्पत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया के तहत इकबाल मिर्ची की यह सम्पत्ति वर्ष 2004-05 में कुर्क की गई थी। केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के एक तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि वर्ष 2007 में इसकी नीलामी का प्रयास किया गया था। लगभग डेढ़ दर्जन पार्टियां आईं और मुंबई के एक व्यक्ति ने लगभग ढाई करोड़ रूपये की बोली लगाई तथा दस लाख रूपये जमा भी किए, लेकिन बाद में उसने इसे खरीदने से इंकार कर दिया। एक दूसरी पार्टी भी बंगला एवं उसकी जमीन लेने से पीछे हट गई, तो इस सम्पत्ति को वित्त मंत्रालय के सुपुर्द कर दिया गया।
अब बोलेगा मिर्ची तो रोएगा डॉन दाउद
दुनिया के सबसे बड़े गुनाहगार दाउद इब्राहिम का सबसे बड़ा राजदार इकबाल मिर्ची अब सलाखों के पीछे पहुंच गया है। यह एक ऐसी गिरफ्तारी है जिससे दाउद के पसीने छूट गये हैं। अब दाउद के कई सारे राज बाहर आने की बात कही जा रही है जिनसे दाउद के गैर कानूनी कारोबार फल-फूल रहे हैं। ऐसे में अगर यह कहें कि मिर्ची की गिरफ्तारी ने पूरे डी कंपनी को एक बड़ा झटका दिया है तो कोई अतिश्येक्ति नहीं होगी।
सुरक्षा एजेंसियों के बड़े अधिकारियों की मानें तो मिर्ची दाउद का राइट हैंड बताया जाता है ऐसे में उसकी गिरफ्तारी अंडरवर्ल्ड में दाउद के पकड़ पर भी असर डाल सकती है। जानकारों का यह भी कहना है कि मिर्ची की गिरफ्तारी की खबर के बाद दाउद अपना ठिकाना जरुर बदल सकता है और कुछ समय के लिये अपने गैरकानूनी धंधों पर लगाम लगा सकता है।












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