दशहरे पर एमपी में होती है रावण की पूजा

जय लंकेश मित्र मंडल के अध्यक्ष महेश गौहर ने बताया कि रावण भगवान शिव के परम भक्त और प्रकांड विद्वान थे। हम चाहते हैं कि दशहरे पर जगह..जगह रावण का दहन नहीं बल्कि उनकी पूजन हो। गौहर ने बताया कि उनका संगठन इस बार भी दशहरे पर गाजे - बाजे के साथ रावण की पूजा अर्चना करेगा। इस मौके पर दशानन की आरती होगी और प्रसाद भी बांटा जायेगा। उन्होंने बताया कि शहर में रावण के मंदिर के निर्माण का काम भी पूरा होने वाला है ताकि विधि - विधान से उनके आराध्य की हर रोज पूजा अर्चना हो सके।
इस 65 वर्षीय शख्स पर रावण की भक्ति का रंग कुछ इस कदर चढ़ा है कि उन्होंने तीन साल पहले दशहरे पर अपने पोते का नाम लंकेश्वर और पोती का नाम चंद्रनखा रखने का फैसला किया। इस मौके पर एक पुरोहित की मदद से बाकायदा नामकरण संस्कार भी किया गया। गौहर ने बताया कि उन्होंने सरकारी या गैर सरकारी संगठनों अथवा किसी आम व्यक्ति से रावण का मंदिर बनवाने के लिये दान में जमीन मांगी थी। लेकिन इस कोशिश में नाकामी पर उन्होंने आखिरकार अपनी पुश्तैनी जमीन पर यह मंदिर बनवाने का काम शुरू कराया। रावण भक्तों के संगठन के अध्यक्ष की मानें तो दशानन की बहन का असली नाम चंद्रनखा ही था। लक्ष्मण ने जब उसकी नाक काटी तो उसे शूर्पनखा के नाम से जाना गया।
उन्होंने बताया कि हम परिसंवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिये रावण के व्यक्तित्व के छिपे पहलुओं को सामने लाकर उनकी आम छवि बदलने की कोशिश करते हैं। इसके साथ ही जनता से अनुरोध करते हैं कि दशहरे पर रावण के पुतले फूंकने का सिलसिला बंद हो। गौहर बताते हैं कि मध्यप्रदेश में उन जैसे रावण भक्तों की कमी नहीं है। प्रदेश के विदिशा, मंदसौर, पिपलदा उज्जैन, महेश्वर और अमरवाड़ा छिंदवाड़ा में अलग..अलग रूपों में रावण की पूजा होती है। उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में भी कुछ स्थानों पर रावण को आराध्य का दर्जा हासिल है।












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