सेना में शामिल होने वाली पहली महिला जवान बनीं, शांति तिग्गा

उन्होंने कहा कि उसने सभी शारीरिक परीक्षण में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। उसने 1.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में पांच सेकंड कम वक्त लिया। उसने 50 मीटर की दूरी 12 सेकंड में तय की जिसे उत्कृष्ट माना गया। भारतीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान तिग्गा ने बंदूक को हैंडल करने के अपने कौशल से अपने प्रशिक्षकों को काफी प्रभावित किया और निशानेबाजों में सर्वोच्च स्थान हासिल किया। तिग्गा ने कहा कि मैं अपने पति की मृत्यु के बाद 2005 में अनुकंपा के आधार पर रेलवे में शामिल हुई। पिछले साल मुझे टी ए रेलवे के बारे में जानकारी मिली और मैंने इसके लिए स्वयंसेवा दी। उस वक्त मुझे पता नहीं था कि अधिकारी स्तर से नीचे कार्मिक के तौर पर सेना में इससे पहले कोई महिला नहीं शामिल हुई थी लेकिन वह शायद ही प्रतिरोधक था।
एक अधिकारी ने कहा कि शारीरिक परीक्षण डिल और गोलीबारी समेत आरटीसी में समूचे प्रदर्शन में उसे सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु आंका गया। तिग्गा ने कहा कि सेना में शामिल होने का उनका हमेशा से सपना था। उन्होंने कहा कि मेरे कुछ रिश्तेदार सशस्त्र बलों में थे और मैं सेना का हिस्सा बनने के लिए हमेशा उनसे प्रेरित होती थी। मैंने शारीरिक परीक्षण पास करने के लिए जीतोड़ तैयारी की। मैं जानती हूं कि सेना में पहली महिला जवान बनकर मैंने अपने परिवार को गौरवान्वित किया है।












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