जाएं और अपनी सास इंदिरा गांधी से कुछ सीखें सोनिया: अन्ना हजारे

टीवी चैनल्स को दिये गये साक्षत्कार में आडवाणी के रथयात्रा के संबंध में अन्ना हजारे ने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि आडवाणी की रथ यात्रा देश और समाज के भलाई के लिये निकाली जा रही है। अन्ना हजारे ने कहा कि आडवाणी के रथ यात्रा का मकसद सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक बटोरना है। अन्ना से जब यह पूछा गया कि क्या वह आडवाणी के रथ यात्रा को समर्थन देंगे तो इसपर अन्ना ने जबाब देते हुए कहा कि 'यदि आडवाणी समर्थन मांगते हैं तो भी हम उन्हें समर्थन नहीं देंगे।
अन्ना ने कहा कि हम उन्हें समर्थन सिर्फ एक शर्त पर देंगे जब बीजेपी शासित राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो और भाजपा जनलोकपाल बिल को खुले तौर पर समर्थन करे। अन्ना हजारे ने कहा कि वह कभी भी किसी ऐसे राजनीतिक पार्टी का ही साथ देंगे जो भ्रष्टाचार मुक्त हो और जिसका ताल्लुक कांग्रेस और बीजेपी से नहीं हो। अन्न ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस पार्टी के कई नेता खुद को प्रधानमंत्री ही समझते हैं। मनमोहन सिंह के संबंध में उन्होंने कहा कि वह तो बेहद ही सरीफ इंसान हैं मगर उनका रिमोट कंट्रोल सोनिया गांधी के हाथ में है।
अन्ना ने कहा कि मनमोहन सिंह की पार्टी में एक नहीं चलती है। अन्ना हजारे से जब यह पूछा गया कि पार्टी का कौन सा नेता खुद को प्रधानमंत्री समझता है तो उन्होंने नाम लेने से इंकार कर दिया। अन्ना हजारे ने कहा कि मैने अगर नाम लिया तो मेरे उपर केस दर्ज हो जायेगा और अब मै दोबारा केस दर्ज कराना नहीं चाहता क्योंकि पहले से ही मेरे उपर 12 केस दर्ज हैं।
अन्ना हजारे ने कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी को एक नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपनी सास इंदिरा गांधी से कुछ सिखना चाहिए। अन्ना हजारे ने कहा कि सत्ता की बागडोर जबतक सोनिया गांधी के हाथ में देश का कुछ भी नहीं हो सकता। अन्ना ने कहा कि सानिया को इंदिरा गांधी के सिद्धांतों को अपनाना चाहिए। अन्ना हजारे ने कहा कि इंदिरा गांधी तो चुनाव हार गई थी और उसके बाद जब वह सत्ता में आई और प्रधानमंत्री बनी तो उन्होंने जीत का राज समझ लिया था। अन्ना ने कहा कि इंदिरा गांधी को समझ में आ गया था कि देश के गरीब जनता को साथ लेकर चलना है और उनके लिये काम करना है।












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