भ्रष्टाचार के खिलाफ एतिहासिक मिसाल, भ्रष्ट आईएएस अधिकारी की संपत्ति जब्त

आपको बताते चलें कि राजग सरकार ने अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को जब्त करने के लिये एक विधेयक बनाया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह एक ऐसा कानून है जो देश के और किसी राज्य में नहीं है। सरकार जब्त किये गये बंगले के स्थान पर विद्यालय खोलने के मूड में है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले आईएस अधिकारी श्री वर्मा के खिलाफ स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मुकदमा दर्ज किया हुआ हैं।
छह जुलाई 2007 को एजेंसी ने उनके ठिकानों पर छापा मारा था। छापा मारने वाली टीम को श्री वर्मा के लॉकर से 9 किलो सोना बरामद हुआ था। जिस समय छापेमारी की गई थी उस समय श्री वर्मा लघु सिंचाई विभाग में सचिव पद पर तैनात थे। इतना ही नहीं इससे पहले श्री वर्मा हमेशा से महत्वपूर्ण पदों पर ही तैनात रहे।
छापेमारी के बाद श्री वर्मा पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मामला कोर्ट में पहुंचा और कार्रवाई शुरु कर दी गई। विशेष अदालत में आरोप सिद्ध हो गया तो श्री वर्मा ने राहत के लिये हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। श्री वर्मा को इस याचिका से कोई फायदा नहीं हुआ और 11 मई 2011 को विशेष न्यायाधीश ने राज्य सरकार के बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 के एक्ट-13 ई के तहत संपत्ति जब्ती का फैसला सुनाया था। 19 अगस्त 2011 को पटना हाइकोर्ट ने इस पर अपनी मुहर लगा दी।
संपत्ति जो आईएएस अधिकारी के घर से बरामद की गई
जांच एजेंसी को वर्मा के खिलाफ 3 जुलाई 2007 को आय से 68.70 लाख रुपये अधिक संपत्ति रखने की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान एजेंसी ने 20 लाख रुपये नगद, 25 हजार अमेरिकी डॉलर, 23 लाख रुपये का घरेलू सामान, 3 लाख 55 हजार रुपये के आभूषण, लगभग 90 लाख रुपये कीमत का सोना, 27 हजार रुपये का बेबली स्कॉट रिवाल्वर, लगभग 2 लाख रुपये की भूमी की जानाकारी मिली।
अवैध संपत्ति को कोई छुपा नहीं सकता
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी जंग का सार्थक चरण है। नई व्यवस्था के कारण अब लोग गड़बड़ी करने से डरेंगे। इसी मामले में साबित हो गया कि कोई गलत तरीके से संपत्ति अर्जित कर उसे छुपा नहीं सकता है। ऐसी संपत्तियों को जब्त कर हम स्कूल खोलेंगे और उसका सार्वजनिक उपयोग होगा।












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