पृथ्‍वी से 40 प्रकाश वर्ष दूर ग्रह पर भी है पानी

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देहरादून। लंबे समय से अन्य विषयों में जीवन की मौजूदगी के सवाल ने विभिन्न विचारकों एवं वैज्ञानिकों को उलझा रखा है। आज टैक्नोलोजी ने दूरदर्शी (टैलीस्कोप) को वह शक्ति और सुदूर अंतरिक्ष पहुंच दे दी है। जिसकी 50 वर्ष पूर्व केवल कल्पना की जा सकती थी। आकाश के तारे अब केवल बिंदु रूप में ही दूरदर्शी में नजर नहीं आते। उनकी सतह के सूक्ष्म लक्षणों का भी आभास आज की तकनीक से संभव हो गया है। इसी कडी में खगोल वैज्ञानिकों को ऐसे अनेक तारों का पता चला है जिनके अपने ग्रह हैं।

भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बंगलुरू के पूर्व खगोल शास्त्री प्रो आरसी कपूर ने बताया कि 10 अगस्त 2011 तक 573 ऐसे बाहय ग्रहों की खोज हो चुकी है। इनमें से अधिकांश विशाल गैसीय बिंदु है तो कुछ ठोस धातु, कुछ चट्टानी तो कुछ कार्बन बाहुल्य अर्थात हीरे के विशाल पिंड। ऐसे बहुत कम ग्रह हैं, जिनमें पानी के पिंड मिले हों।

हाल ही में एक ऐसे ग्रह का पता चला है जिसमें पानी की मौजूदगी के संकेत मिलते हैं। यह 5 प्वाइंट (कैंसरी-ई) नामक तारे का सदस्य है। यह तारा हमसे 40 प्रकाश वर्ष दूर है। अर्थात यहां से चला प्रकाश हम तक 40 वर्षों में पहुंचता है। यह नया ग्रह आकार में पृथ्वी से दोगुना बडा किंतु नौ गुना भारी है। अनुमान है कि यह पृथ्वी की भांति ठोस चट्टानी अवस्था में है। इस ग्रह पर जल व हाइड्रोजन गैस की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इसकी सतह के तापमान 2700 डिग्री है। जो जीवन के लिए सहारा देने के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं है।

इस ग्रह का पता कनाडा के मोस्ट नामक अंतरिक्ष टैलीस्कोप से जोर्स बिस नामक वैज्ञानिक और उनके सहयोगियों ने लगाया है। यह ग्रह अपनी कक्षा में चक्कर काटते हुए तारे के सामने से गुजरता है तो एक ग्रहण की स्थिति बन जाती है उस हालत में तारे के प्रकाश में एक सूक्ष्म बदलाव आता है। इस प्रकार से ग्रहण लगते की स्थिति असाधारण है और खगोल वैज्ञानिकों को इसके जरिए नए ग्रहों की खोज में मदद मिली है।

यह नया ग्रह अपने तारे का 18 घंटे में एक चक्कर लगा लेता है अर्थात् इसका एक वर्ष 18 घंटे के बराबर है। सौर मंडल के इतना निकट होने के कारण वैज्ञानिकों की इस तारे और इसके ग्रह में गहरी दिलचस्पी है। यद्यपि इस ग्रह में जीवन की संभावना शून्य है फिर भी वैज्ञानिकों को तलाश अन्य ग्रहों की है। जिन पर पृथ्वी से मिलते-जुलते वातावरण में जल-द्रव्य अवस्था में रह सकता हो। इसके लिए जरूरी है कि ग्रह तारे से उसकी चमक व तापमान के मद्देनजर उचि दूरीपर हो व उसका पथ लगभर गोलाकार हो। व वातावरण लंबे समय तक उस रेंज में गर्म व घना रह सके जो जीवन की उत्पत्ति व उसके बने रहने में सहायक हो।

कुछ अन्य ग्रहों की भी खोज हुई है जो इस कसौटी पर लगभग खरे उतरते हों। यदि किसी तारे के ग्रह में जीवन के लिए आवश्यक घटकों की मौजूदगी के संकेत मिले तो वह भविष्य में नई खोज के लिए द्वार खोल देगा। नासा अमेरिका का केपलर मिशन जिसे मार्च 6 2009 को छोड गया पिछले कुछ महीनों से आकाश गंगा की एक विशेष दिशा में लगभग एक लाख तारों का अध्ययन करेगा। इसने अब तक 1235 एसे पिंडों का पता लगाया, जो ग्रह हो सकते हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य है, पृथ्वी पर ग्रहों का पता लगाना। जहां जीवन पनप सकता हो।

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