देश का युवा तो यहां है, राहुल गांधी कहां हैं

आपको बता दें कि ये वही राहुल है जो कि पूरे देश में युवाओं को अपना सबसे अच्छा सहयोगी मानते है, और चाहे वो भट्टा परसौल हो, पुणे हो या फिर लखीमपुर हर मामले में राहुल ने तेजी से अपने कदमों को बढ़ाया था। लेकिन भ्रष्ट्राचार के इस मुद्दे ने जो पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है वहीं राहुल का कही भी अता-पता नहीं है। यहां तक कि अभी तक उन्होने देश के इतने बड़े मुद्दे पर एक बयान तक नहीं दिया है।
यह निश्चय ही राहुल गांधी के राजनितीक भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है कि देश का युवा जिसे अपनी पहली पसंद मानते थे, अब वहीं उनसे किनारा कस रहे है। इसका एकमात्र कारण है कि आज अन्ना हजारे ने अपने आंदोलन से समूचे देश में एक ऐसी उर्जा भर दी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अन्ना हजारे ने भ्रष्ट्राचार के मुद्दे को लेकर जो हुंकार भरी है, आज देश का हर युवा उसका हिस्सा बनना चुका है।
जैसा कि आप सभी जानते है कि युवा का उल्टा वायु होता है, तो यह वास्तव में सत्य है। जिस तरह वायु को बांध के नहीं रखा जा सकता है, ठीक उसी प्रकार युवा को भी अपने बातों और प्रलोभन से ज्यादा देर तक नहीं बांधा जा सकता है। क्योंकि युवा सिर्फ एक उम्र नहीं होती है, युवा एक सोच होती है जिसे अन्ना हजारे ने दिखा दिया है। उम्र अन्ना हजारे के शरीर को भले ही कमजोर कर दे लेकिन उनके जवां और बुलंद इरादे को छू भी नहीं सकती है।
इसके अलांवा कांग्रेस के लिए वर्तमान समय बहुत ही असमंजस भरा है। अभी तक कांग्रेस एक बार भी इतने बड़े मामले पर सख्त होती नहीं दिखी है। इसका एक अंदाजा ये भी लगाया जा रहा है कि वर्तमान सरकार में निर्णय लेने की कमी है, और इस सरकार में एक दूसरे के सिर पर ठीकरे फोड़ने की आदत है। अन्ना हजारे के अनशन के मामले पर जहां पूरा देश सरकार का मूंह ताक रही थी वहीं सरकार ने इसे दिल्ली पुलिस के सिर मढ़ दिया था।
वर्तमान में कांग्रेस के अंदर किसका निर्णय माना जा रहा है, इसके बारें में कुछ भी बता पाना बहुत ही मुश्किल होगा। क्योंकि जहां आज कांग्रेस की सर्वेसर्वा सोनिया गांधी अपने देश में नहीं है वहीं देश में इतनी बड़ी खलबली मची हुयी है। कांग्रेस को खड़ा करने वाली देश की जनता ही अब उसके खिलाफ हो गयी है। इस कठीन परिस्थिती में यदि समय रहते राहुल गांधी द्वारा कोई उचित निर्णय न लिया गया तो, शायद कांग्रेस को और ज्यादा विरोध का सामना करना पड़े।
राहुल गांधी का इतने बड़े मुद्दे पर चुप्पी साधे रहना देश की जनता को तनिक भी समझ में नहीं आ रहा है। इधर बीच जिस तेजी से राहुल की छवी बनी थी कि कभी भी देश की जनता के बीच कहीं भी आते जाते है और युवओ के लिए सदैव तैयार रहते है। अब यह छवी धुमिल होती नजर आ रही है। क्योंकि सभी को उम्मीद थी कि जैसे राहुल देश भर में युवाओं को अपने से मिलाने का काम करते है, ठीक वैसे ही जब देश का युवा किसी मुद्दे पर सकत्र होगा तो राहुल वहां जरूर होंगे। किसी भी नेता के लिए उसके अपने लोगों के बीच विश्वास को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण और सबसे कठीन होता है। अब देखना यह है कि क्या इतने बड़े मुद्दे पर राहुल गांधी अपनी चुप्पी तोड़ेंगे और देश के युवा का साथ देंगे।












Click it and Unblock the Notifications