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मेरा रंग दे बसंती चोला, रंग दे रंग दे

Youth powered the Anna Hazare Movement
जी हां आज वो वक्‍त आ चुका है, जहां आज समूचा देश अन्‍ना की राह पर चलने को तैयार है। अन्‍ना की यह आंधी, गांधी की दांडी यात्रा से तनिक भी कम नहीं है। देश के हर नागरिक की होंठ और दिल की धड़कनों पर अन्‍ना का नाम है। अन्‍ना के इस तूफान ने जहां वर्षो से सोये भारतीयों की आत्‍मा को अंदर से झकझोर कर दिया है वहीं इस गूंगी, बहरी सरकार की चेतना पर भी हमला किया है। अन्‍ना के इस सहयोग में सबसे ज्‍यादा देश के युवाओं ने अपने कदम बढ़ाए हैं। हमारे "इंडिया अंगेस्‍ट करपशन" नाम की कम्‍यूनिटी में अब तक पौने चार लाख से भी ज्‍यादा लोग शामिल हो चुके है।

ये वो लोग है, जो किसी न किसी वजह से सरकार से नाराज है, और अन्‍ना जो कि आज के युवाओं के लिए एक ब्रांड नेम बन चुके है उनकी राह पर चलने को तैयार है। ये वो लोग है, जो अपने निजी जिंदगी में व्‍यस्‍त है लेकिन अपनी भारतीयता की पहचान और देश में भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ छिड़ी इस जंग में इसी बहाने अपनी उपस्थिती दर्ज करा रहें है।

आधुनिक तकनिकी में भी अन्‍ना अव्‍वल

यह सच है कि जब जब देश में कोई आंधी आयी है, तो उसे हवा देने के लिए किसी न किसी तकनिकी ने बहुत साथ दिया है। कुछ ऐसा ही इस बार भी हुआ है। जहां अन्‍ना की इस मांग से सरकार अपने नजरे चुरा रही है, वही इस सरकार को खड़ा करने वाले उसके देशवासी ही अन्‍ना के सहयोग में सड़को पर उतर चुके है। अन्‍ना हजारे, पुरा नाम "किसन बाबु राव हजारे" आज के युवाओं की पहली पसंद बन चुके फेसबुक और ट्वीटर पर जो कमाल कर दिखाया है, वो शायद इस सरकार के युवराज, और देश के अन्‍य चर्चित चेहरे भी नहीं दिखा पायें।

अन्‍ना ने फेसबुक में अपने फैन्‍स की पहाड़ रूपी लिस्‍ट से कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी तक को पिछे छोड़ दिया है। अन्‍ना की इस आधी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि, अभी तक देश के युवाओं की पहली पसंद रहे युवा राहुल गांधी को इस 73 वर्षीय बुजुर्ग से फेसबुक के फैन्‍स की दौड़ में करारी शिकस्‍त दी है। अन्‍ना हजारे ने जनलोकपाल बिल का मुद्दा क्‍या उठाया देश भर के नौजवान, बच्‍चे, और बुजुर्गो का भारी हुजूम एक तरफ हो गया।

मैनेजमेंट, मेडिकल और इंजिनयरिंग में अन्‍ना की धूम

जैसा कि आप सभी जानते है, कि मैनेजमेंट, मेडिकल और इंजिनयरिंग की पढ़ाई कीतनी कठीन होती है। हमारे देश के मैनेजमेंट, मेडिकल और इंजिनयरिंग के छात्रो की दिवानगी अभी तक फिल्‍मो, और क्रिकेट तक ही सिमट कर रह गयी थी। लेकिन हमारे देश में ऐसा पहली बार हुआ है कि मैनेजमेंट, मेडिकल और इंजिनयरिंग के छात्र भी अन्‍ना की इस आग में बगैर किसी भी भय के कूद पड़े।

अन्‍ना ने अपनी इस आंदोलन की शुरूआत एक अनशन से की, और तिहाड़ तक का सफर करने के बाद आज दोबारा देश की जनता के बीच पहुंचे है। अन्‍ना द्वारा शुरू की गयी देश की दूसरी आजादी की इस जंग में इलाहाबाद, दिल्‍ली, लखनउ, कानपुर, वाराणसी, बेंगलूरू, मुम्‍बई जैसे शहरो के छात्रो ने वो करिश्‍मा कर दिखाया जिसे देखकर वर्तमान में केंद्र में बैठकर कुर्सिया तोड़ रही सरकार को अपने बगले झांकने पर मजबूर होना पड़ गया।

अन्‍ना के हाथ, बच्‍चो का भी साथ

अन्‍ना हजारे के सर्मथन का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि अन्‍ना के इस आंदोलन में वो भी कूद पड़े है, जिन्‍हे कभी अपने खेलों से भी फुर्सत नहीं थी। हम बात कर रहे देश के उन छोटे बच्‍चो की जो शायद लोकपाल बिल के बारें में कुछ भी नहीं जानते लेकिन सिर पर "मै अन्‍ना हूं" की टोपी और हाथ में तिरंगा लिए पूरे देश में चौ‍कड़ी भरते फिर रहे है।

शायद इसे ही देश के प्रति उठा जूनून कहते है, जो कि उम्र, जाति, धर्म, राजनिती, या किसी भी भौतिक सुख से उपर उठकर पैदा होता है। देश की सरकार यह माने या न माने लेकिन इस सरकार को बनाने वाला पूरा देश मान चुका है कि यह अन्‍ना नहीं आंधी, देश का दूसरा गांधी है। अन्‍ना को गांधी का रूप देश इसलिए कह रहा है, क्‍योंकी अहिंसा द्वारा सरकार से ही मंजूरी लेकर बड़े ही शालिनता से अपनी बात कह रहे है अन्‍ना हजारे।

अन्‍ना नहीं ये आंधी है, देश का दूसरा गांधी है।

जहां हमारे देश के नेताओं ने राजनिती की परिभाषा ही बदल कर रख दी है। वहीं अन्‍ना हजारे ने उन सभी नेताओं को (जो देश में उत्‍पात मचाकर अपनी मांग रखते है) उन्‍हे आइना दिखा दिया है। ना तो अन्‍ना ने रेल की पटरियां तोड़ी, ना दंगे फैलाए, ना तो दूकानो में आग लगायी और नहीं किसी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुचाया इन सारी बातों से कभी भी तार्रूख न रखने वाले अन्‍ना ने बस एक आवाज उठायी, और आज पूरा राष्‍ट्र उनके साथ हो लिया।

विदेशों में अन्‍ना की धूम

देश तो देश, देश के बाहर भी अन्‍ना ने अपने विचारों से धूम मचा रखी है। अमेरिका, इंगलैंड, जैसे देशों में रहने वाले भारतीय जो अन्‍ना के इस आंदोलन में दिल्‍ली नहीं आ सकते थे। उन्‍होने गैर मुल्‍क में ही अन्‍ना का समर्थन किया है। इससे साफ पता चलता है कि, आज सभी भारत वासी देश को चोला बसंती रंग में रंगने को बेताब है। अन्‍ना की यह लहर हमारे पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान तक जा पहुंची है।

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