अन्ना के सिपाही हैं भारत के असली हीरो

नई दिल्ली । अन्ना की आंधी में पूरा देश एक हो गया है। कन्याकुमारी से कश्मीर तक केवल एक ही नाम गूंज रहा है और वो है अन्ना। चाहे बूढ़ा हो या जवान आदमी हो या औरत हर कोई कह रहा है ..मैं अन्ना हूं..।

अन्ना के समर्थन में देश एक हो गया है। अन्ना के साथ खड़े कुछ लोग युवाओं के लिए आईकॉन बनते जा रहे हैं। लोग अन्ना अन्ना कह रहे हैं और अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और मनीष सिसोदिया की बातें सुनना पसंद कर रहे हैं। आखिर कौन है ये लोग, अचानक से कहां से आ गये और हीरो -हीरोईन की तरह लोगों के दिलों में उतर गये। आईये जानते हैं देश के इन नये नायकों के बारे में ...

किरण बेदी : भारत के इस पु्त्री पर हर भारतीय को गर्व होगा। देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी ने वो कर दिखाया जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं । एक आईपीएस के तौर पर किरण बेदी ने पुलिस विभाग ने बहुत परिवर्तन करने की कोशिश की और काफी हद तक कामयाब भी रही।

किरण बेदी ने एक समाज सुधारक की हैसियत से समाज को एक नयी दिशा देने की कोशिश की। उनके उत्कृष्ठ योगदान के लिए किरण को कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। किरण को शौर्य पुरस्कार, रमन मैगसेसे पुरस्कार , जर्मन फाउंडे्शन का जोसफ ब्यूज पुरस्कार, एशिया रीजन एवार्ड,अमेरीकी मॉरीसन-टॉम निटकॉक पुरस्कार और इटली के 'वूमन ऑफ द इयर 2002 पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।


अरविंद केजरीवाल : आजकल देश की केवल एक ही आवाज है और वो हैं अरविंद केजरीवाल। आखिर इस व्यक्ति में ऐसी कौन सी चुंबकीय शक्ति है जिसकी वजह से लोग इनकी ओर खींचे चले आ रहे हैं। देश से भ्रष्टाचार को पूरी तरह से मिटाने में जुटे अरिवंद केजरीवाल ने खड़गपुर आईआईटी से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी।

उसके बाद आईआरएस विभाग में दिल्ली में आयकर आयुक्त कार्यालय में नियुक्ती मिली। लेकिन वहां फैली अराजकता और भ्रष्टाचार ने अरविंद का मन खिन्न कर दिया और उन्होने नौकरी छोड़ दी। उसके बाद उन्होंने संस्था 'परिवर्तन' में काम करने लगे। उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के लिए अभियान शुरू किया, जो जल्दी ही एक मूक सामाजिक आन्दोलन बन गया, दिल्ली में सूचना अधिकार अधिनियम को 2001 में पारित किया गया। आज वो तन मन धन से अन्ना की मुहीम से जुड़े हुए हैं।

मनीष सिसोदिया : सूचना के अधिकार के लिए लंबे समय से जुड़े मनीष सिसोदिया आज जन-जन में लोकप्रिय है। उन्हें अन्ना हजारे का बेहद करीबी माना जाता है। सादगी पसंद मनीष सिसोदिया को लोग अच्छा वक्ता भी कहते हैं। युवाओं को प्रोत्साहित करने वाले मनीष सिसोदिया ने अपना पूरा जीवन देश के नाम कर दिया है।

अखिल गोगोई : आरटीआई यानी की सूचना के अधिकार के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अखिल गोगोई को साल 2008 में संनमुघम मंजूनाथ इंटीग्रीटी अवार्ड से नवाजा जा चुका है। सूचना के अधिकार के लिए लंबे समय तक लड़ाई करने वाले अखिल गोगोई ने असम में फैले कई इंदिरा आवास घोटालों को उजागर किया जिसके चलते इनको कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

शांति भूषण : शांति भूषण भारत के भूतपूर्व विधिमंत्री एवं वरिष्ट अधिवक्ता हैं। सन् 2001 में उन्हें विश्व के सबसे शक्तिशाली लोगों की सूची में 74वें स्थान पर रखा गया था। वे भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करने वालों में अग्रणी हैं।

प्रशांत भूषण : वैसे रिश्ते में तो ये शांतिभूषण के पुत्र हैं लेकिन देश के ये अच्छे अधिवक्ताओं की श्रेणी में आते हैं। इन्होंने लगभग 15 सालों से लगभग पीआईएल से जुड़े मुकदमें लड़े हैं।

स्वामी अग्निवेश : स्वामी अग्निवेश भारत के एक सामाजिक कार्यकर्ता, सुधारक, राजनेता और सन्त पुरुष हैं। आर्य समाज का काम करते-करते 1968 में उन्होंने एक राजनीतिक दल आर्य सभा बनाया। बाद में 1981 में बंधुआ मुक्ति मोर्चा की स्थापना उन्होंने दिल्ली में की। स्वामी अग्निवेश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान औऱ पुरस्कार मिले हैं। इसके अलावा वे लगातार 3 बार संयुक्त राष्ट्र संघ की एक कमेटी के संयोजक भी चुने जाते रहे हैं।

मेधा पाटकर : मेधा पाटकर सिविल सोसायटी की तो सदस्य नहीं है लेकिन ये भी अन्ना टीम की बेहद ही करीबी मानी जाती है। नर्मदा बचाओ अभियान को लेकर चर्चित मेधा पाटकर ने अपना संपूर्ण जीवन देश के नाम कर दिया है। उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए कई देशी-विदेशी पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। आज भारत के हर नागरिक को अपनी इस बेटी पर गर्व है।

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