अनशन और अन्ना तो चोली-दामन का साथ है

Anna Hazare is an Anshan man, creates History
नई दिल्ली । समाजसेवी अन्ना हजारे ने इस समय दिल्ली पुलिस और सरकार की नाक में दम कर दिया है। आश्चर्य होता है कि आज पूरे देश को एक 74 साल के बूढ़े व्यक्ति पर देश की सरकार से ज्यादा भरोसा है। आखिर अन्ना में ऐसी क्या बात है जिसकी वजह से आज अन्ना के समर्थन में देश की लगभग पूरी जनता है।

तो आपको बता दें कि देश में इस समय दूसरे गांधी के नाम संबोधित किये जाने वाले अन्ना हजारे ने अपना पूरा जीवन देश और समाज सेवा के नाम किया है।ये कोई पहली बार नहीं है कि अन्ना अनशन करने जा रहे है इससे पहले कई बार अन्ना हजारे अपने अनशन के जरिये टेढ़ी से टेढ़ी सरकार को झुका दिया है। आईये आपको बताते है कि अन्ना ने अपने अनशन के जरिये कब-कब विरोध का बिगुल फूंका।

महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन 1999

विकिपीडिया के मुताबिक 1999 में अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र में शिवसेना -भाजपा की सरकार से खफा थे। अन्ना का कहना था कि इस सरकार में दो मंत्रियों ने भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं पार कर दी है जिसके चलते उन्हें तुरंत हटाया जाये। अन्ना ने अपनी बात रखने के लिए अनशन किया था। इन मंत्रियों के नाम थे शशिकांत सुतर, महादेव शिवांकर और बबन घोलाप।

अन्ना हजारे ने उन पर आय से ज़्यादा संपत्ति रखने का आरोप लगाया था। सरकार ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उसे हारकर दो मंत्रियों सुतर और शिवांकर को हटाना ही पड़ा। घोलाप ने अन्ना के खिलाफ़ मानहानि का मुकदमा कर दिया। अन्ना अपने आरोप के समर्थन में न्यायालय में कोई सबूत पेश नहीं कर पाए और उन्हें तीन महीने की जेल हो गई।


सूचना का अधिकार आंदोलन 1997-2005

1997 में अन्ना हज़ारे ने सूचना के अधिकार क़ानून के समर्थन में मुंबई के आजाद मैदान से अपना अभियान शुरु किया। 9 अगस्त, 2003 को मुंबई के आजाद मैदान में ही अन्ना हजारे आमरण अनशन पर बैठ गए। 12 दिन तक चले आमरण अनशन के दौरान अन्ना हजारे और सूचना के अधिकार आंदोलन को देशव्यापी समर्थन मिला। आख़िरकार 2003 में ही महाराष्ट्र सरकार को इस क़ानून के एक मज़बूत और कड़े मसौदे को पास करना पड़ा।

5 अगस्त, 2006 में सूचना के अधिकार में संशोधन प्रस्ताव के खिलाफ अन्ना ने 11 दिन तक आमरण अनशन किया, जिसे देशभर में समर्थन मिला। इसके परिणामस्वरूप सरकार ने संशोधन का इरादा बदल दिया।

महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन 2003

साल 2003 अन्ना ने कांग्रेस और एनसीपी सरकार के चार मंत्रियों-सुरेश दादा जैन, नवाब मलिक, विजय कुमार गावित और पद्मसिंह पाटिल को भ्रष्ट बताकर उनके खिलाफ अनशन किया और सरकार को झुकना पड़ा।


लोकपाल विधेयक आंदोलन 2011

5 अप्रैल 2011 को अन्ना ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूपीए सरकार के खिलाफ अनशन किया। अन्ना ने कहा कि जनलोकपाल विधेयक संसद में पेश किया जाये। और इसके दायरे में प्रधानमंत्री को भी होना चाहिए। पहले तो सरकार काफी उदासीन रही लेकिन जैसे ही अन्ना के समर्थन में लोग एकत्र होने लगे तो सरकार ने एक कमेटी बनाकर मामले को टालने की कोशिश की।

16 अगस्त 2011

जनलोकपाल बिल के लिए अन्ना हाजरे अनशन की परमिशन मांगी थी लेकिन दिल्ली पुलिस ने नहीं दी। जिसके बाद भी अन्ना ने अनशन की जिद की। उन्हें गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया गया लेकिन दो घंटे बाद उन्हें बेल दे दी गई लेकिन अन्ना ने जेल से बाहर आने से इंकार कर दिया। अन्ना के अनशन के आगे दिल्ली पुलिस झुक गयी और अब अन्ना का अनशन रामलीला मैदान में कल से होगा । अन्ना अभी भी अनशन पर ही है लेकिन तिहाड़ जेल परिसर में।

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