सावन विशेष : अंगुली में अंगुठी..अंगुठी में नगीना..
दोस्तों, हम लगातार आपको महिलाओं के सोलह श्रृंगार के बारे में बता रहे हैं । जानी मानी पत्रिका 'एराउंड द इंडिया' के मई अंक में छपे लेख सोलह 'श्रृंगार की महत्ता' की लेखिका 'कुमद मेहरोत्रा' ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी लेखनी से श्रृंगार का महत्व समझाया है।
कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 11 यानी 'बाजूबंद' के बारे में तो आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 12 यानी 'अंगुठी' के बारें में। वैसे 11 वां श्रृंगार 'आरसी' के रूप में जाना जाता है। आरसी आइने को कहते हैं लेकिन यहां ये भाव नहीं है। आरसी एक सीसा लगी हुई अंगुठी होती है जो कि दायें हाथ की अनामिका में पहनीं जाती हैं।
अंगुठी में लगे सीसे से दुल्हन जब चाहे अपनी सूरत निहार सकती है। इससे उसके मन अपने पति की छवि बनीं रहती है। आजकल बाजारों में अंगुठी के नये नये डिजायन मौजूद हैं। जिन्हें आप अपनी पसंद और क्षमता के आधार पर खरीद सकते हैं।













Click it and Unblock the Notifications