सड़क पर यातायात और क्राइम पर नज़र रखेगी 'थर्ड आई'

Third Eye to watch traffic, crime on road
गुडग़ांव। यातायात नियमों को तोडऩे वाले वाहन चालक अब पुलिस की नजर से बच नहीं पायेंगें। गुडग़ांव पुलिस ने नोकिया इंडिया, मिलेनियम सिटी वलफेयर सोसायटी व डिनेव नामक कम्पनी के साथ मिलकर यातायात नियमों को तोडऩे वालों पर नजर रखने के लिए 'थर्ड आई' प्रोजेक्ट शुरू किया है।

गुडग़ांव के पुलिस आयुक्त सुरजीत सिंह देसवाल ने गुडग़ांव के शंकर चौक से इस प्रोजेक्ट की शुरूआत की। प्रोजेक्ट की शुरूआत करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पुलिस आयुक्त ने बताया कि हमारे देश में पूरे विश्व के केवल 1 प्रतिशत वाहन हैं, लेकिन पूरे विश्व की 10 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं यहां होती हैं। मर्डर से मरने वालों की संख्या के मुकाबले सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि गुडग़ांव पुलिस यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रही है।

8 शहरों में स्थापित होंगे आऊट डोर सरविलेंस सिस्टम

पुलिस आयुक्त ने कहा कि आज शुरू किया गया यह थर्ड आई प्रोजेक्ट सड़क पर यातायात नियमों का पालन नहीं करने वालों पर नजर रखने के लिए सहायक सिद्व होगा। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों को तोडऩे वाले वाहन चालकों पर कड़ी नजर रखने के लिए गुडग़ांव व फरीदाबाद सहित पूरे प्रदेश के 8 शहरों में आऊट डोर सरविलेंस सिस्टम विकसित किया जा रहा है।

गुडग़ांव में आऊट डोर सरविलेंस सिस्टम विकसित करने के लिए हारट्रोन को 15 करोड़ रूपये दे दिये गये हैं जोकि इस प्रोजेक्ट के लिए नोडल एजेंसी है। उन्होंने कहा कि थर्ड आई प्रोजेक्ट से पुलिस को उन स्थानों पर वाहन चालकों पर नजर रखने में सहायता मिलेगी जहाँ आऊट डोर सरविलेंस सिस्टम का कैमरा नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि आऊट डोर सरविलेंस सिस्टम के तहत शहर के मुख्य स्थानों पर कैमरे फिक्स किये जायेंगे जो हर समय निगरानी करेंगें। आऊट डोर सरविलेंस सिस्टम के कैमरों के मुकाबले थर्ड आई के कैमरों को कहीं भी ले जाया जा सकता है जोकि पुलिस के लिए उपयोगी सिद्व होगा।

उत्तर भारत में पहली बार आया प्रोजेक्ट

पुलिस आयुक्त ने बताया कि सड़क पर यातायात नियमों का पालन नहीं करने वालों पर नजर रखने के लिए उत्तर भारत में पहली बार गुडग़ांव में माबाईल फोन का प्रयोग किया जायेगा। इस कार्य के लिए नोकिया कम्पनी ने 50 ई-5 सेट गुडग़ांव पुलिस को उपलब्ध करवाये हैं जिनके माध्यम से यातायात पुलिस के जवान सड़क पर वाहन चालकों के फोटो लेते हैं।

पुलिस जवान द्वारा फोटो लेते ही वह पुलिस के सर्वर पर चला जाता है जिसके लिए डिनेव नामक कम्पनी ने साफ्टवेय बनाया है। सर्वर पर फोटों के साथ स्थान, समय व तारीख की जानकारी भी फोटो खिचते ही चली जाती है। उन्होंने बताया कि सर्वर पर एक टीम प्राप्त हुई फाटों को देखती है और यातायात नियम ताडने वाले वाहन चालक को चालान भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जल्द ही सेटों की संख्या 50 से बढाकर 200 कर दी जायेगी और उसके बाद जरूरत के अनुसार समय-समय पर सेटों की संख्या बढाई जायेगी।

जवानों को दिया जायेगा प्रशिक्षण

इस अवसर पर गुडग़ांव पुलिस के संयुक्त आयुक्त आलोक मितल ने बताया कि थर्ड आई प्रोजेक्ट 15 दिन पहले प्रयोगात्मक आधार पर शुरू किया गया था। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और सोफ्टवेयर तैयार करने वाली कम्पनी को जो कमियां नजर आई उन्हे सुधारा गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जवान को इस प्रोजेक्ट पर तैनात करने से पहले उसे प्रशिक्षण दिया गया है।

प्रशिक्षण में जवानों को बताया गया है कि चलते वाहन की फोटो कैसे लें और फोटो में वाहन की नम्बर प्लेट व तोडा गया यातायात नियम स्पष्ट हो ताकि नियम तोडने वाले वाहन चालक के खिलाफ चालान जारी करने में कोई परेशानी ना आये। उन्होंने बताया कि इन 15 दिनों में प्रोजेक्ट के माध्यम से मिली फोटो के आधार पर लगभग 250 चालान जारी किये गये हैं।

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