सीएजी ने पीएमओ से पूछा कैसे मिली कलमाड़ी को फ्री हैड की छूट?

रिपोर्ट में कलमाड़ी की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े किए गए है। प्रधानमंत्री कार्यालय से पूछा गया है कि पूर्व खेल मंत्री सुनिल दत्त और मणिशंकर अय्यर का इसमें क्या भूमिका थी।
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार को भी खेलों में हुए खर्चों पर ध्यान नहीं देने के लिए जिम्मेदार ठहराया है। सीएजी सूत्रों के मुताबिक सुरेश कलमाड़ी के जानबूझकर लिए गए फैसलों के चलते कॉमनवेल्थ खेलों में काफी नुकसान हुआ है। हालांकि रिपोर्ट में एनडीए सरकार सवालों के घेरे में है पर अन्य विपक्षी दलों को एक बार फिर सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। अब केंद्र सरकार संसद के अंदर और बाहर दोनों तरफ अपना बचाव करती नजर आएगी। पर विपक्षी पार्टियां सरकार को छोड़ने वाली नहीं है। यही कारण है कि
मॉनसून सत्र के दूसरे दिन भी संसद में हंगामा जारी है। दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार को भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे मुद्दों पर घेरने की कोशिश की। हंगामा बढ़ता देख लोकसभा और राज्यसभा को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
राज्यसभा में भाजपा की अगुवाई में विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने की कोशिश की। विपक्षी दलों ने कॉमनवेल्थ घोटाले के आरोपी सुरेश कलमाड़ी की नियुक्ति को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कलमाड़ी को प्रधानमंत्री का खुला समर्थन था।
2जी, कॉमनवेल्थ घोटाला और बढ़ती महंगाई के मसले पर सरकार से जवाब मांगा और नियम 167 के तहत लोकसभा तथा नियम 184 के तहत राज्यसभा में बहस कराने की मांग की। इन नियमों के तहत बहस के साथ मतदान का भी प्रावधान है। सरकार इन मुद्दों पर बहस करना चाहती है, लेकिन वोटिंग कराना नहीं चाहती है। सरकार ने कहा है कि वोटिंग की कोई जरूरत नहीं है बल्कि नियम 193 और 176 के तहत सदन में बहस हो सकती है। कांग्रेस के सांसद संजय निरूपम ने कहा है कि सरकार सभी मुद्दों पर बहस करने के लिए तैयार है, लेकिन मतदान की जरूरत नहीं है।












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