लालू की वापसी की आस अधूरी रह गई

चाहे अन्ना हजारे हो या बाबा रामदेव या फिर विपक्ष सबको लालू यादव ने खूब फटकारा है। पिछले कुछ सालों में कोई ही ऐसा मौका होगा जब लालू ने सोनिया गांधी या कांग्रेस को खुश करने में कोई कसर रखी हो। यूपीए के दूसरे शासनकाल से गठबंधन तोड़ने की भूल करने वाले लालू प्रसाद यादव को अपनी गलती का अहसासा हो गया है। इसीलिए तो वे मंत्रिमंडल में अपनी वापसी का जुगाड़ करते घूम रहे हैं।
वापसी की जीतोड़ कोशिश कर रहे लालू प्रसाद यादव को यूपीए झटका भी दे सकती है। लालू प्रसाद यादव को उम्मीद थी कि शायद डीएमके अपनी इतनी किरकिरी करवाने के बाद समर्थन वापस ले लेगा। इस वजह से मारन और ए राजा की खाली हुई सीटों पर वे अपनी दावेदारी ठोक सकेंगे। लेकिन प्रवण मुखर्जी से डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने मुलाकात कर यह साफ कर दिया कि पार्टी यूपीए को अपना समर्थन जारी रखेगी। अब पार्टी की तरफ से टी आर बालू का नाम मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए सामने आ रहा है।
पिछले हफ्ते लालू प्रसाद यादव ने सोनिया गांधी से मुलाकात कर मंत्रिमंडल में अपनी वापसी की इच्छा जाहिर की थी। सोनिया ने तो लालू की इच्छा को गुहार समझा और इस पर विचार करने के बारे में बोला। लालू ने उनसे अपने पुराने विभाग यानिकि रेलवे को ही वापस करने की इच्छा जताई थी। लेकिन तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी पहले ही रेलवे को अपनी ही पार्टी के पास रखने के बारे में सोनिया गांधी से बोल चुकी हैं। ऐसे में लालू प्रसाद को इससे भी मन मसोसना पड़ा।
लालू प्रसाद यादव के पक्ष में एक ही बात जाती है कि वे जनता के बीच बहुत ही पॉपुलर नेता हैं और विपक्ष को घेरना उन्हें अच्छी तरह से आता है। विश्वास मत के समय यूपीए की सरकार बचाने में लालू प्रसाद यादव का भी बड़ा योगदान था। उस समय वे यूपीए का विश्वास मत बनाए रखने के लिए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को अपने साथ ले आए थे। कांग्रेस अगर उनके इस अहसान को याद रखती है तो लालू प्रसाद यादव की मंत्रिमंडल में वापसी हो सकती है।
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