जुलाई के आते ही खुल गये स्कूल

शुक्रवार को स्कूल का नया सत्र शुरू हो गया। अभिभावक बच्चों को स्कूल यूनीफार्म पहनाकर स्कूल लेकर आ रहे थे। स्कूलों में पहुंचकर जमकर मस्ती की। पहला दिन होने के नाते मैम ने भी किसी से पढ़ाई व कोर्स की बात नहीं की। छोटे बच्चों के क्लास में रौनक लौटी किसी ने मैम को कविता सुनायी तो किसी ने एल्फाबेटस तो किसी ने नम्बर सुनाकर बताया कि छुट्टियों में उसने क्या किया।
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में सबकुछ सामान्य तरीके से शुरू हो गया है लेकिन सरकार खासकर प्राथमिक विद्यालयों में पहला दिन काफी खराब रहा। कहीं अध्यापक ही समय पर स्कूल नहीं आए तो कहीं बच्चे ही पहले दिन नहीं आए। राजधानी के कुछ प्राथमिक विद्यालयों का नजारा उस वक्त देखने लायक हो गया जब मध्यान भोजन के समय के बच्चों की भीड़ बढ़ लेकिन भोजन नहीं आ पाया।
जिन सस्थाओं को भोजन बनाने व पहुंचाने का कार्य आवंटित था उन्होंने आकर सूचना दी कि पहला दिन होने के कारण पैसों की व्यवस्था न हो पाने के कारण भोजन नहीं बन सका। ऐसे में बच्चों को बिस्कुट व नमकीन देकर कल से भोजन दिए जाने की बात कहकर रवाना कर दिया गया। यह तस्वीर तो सरकारी व्यवस्था की थी जिसे अब हर कोई जान गया है।
असली रौनक तक अंग्रेजी स्कूलों में थी जहां पहला दिन होने के बाद भी बच्चे यूनीफार्म में नगर आए। सवेरे से ही राजधानी की सड़कों पर रिक्शा, दो पहिया वाहन, टैक्सी व बसों में बच्चे दिखायी देने लगे। मासूम चहेरों पर स्कूल जाने की व अपने पुराने साथियों से मिलने की खुशी तो कुछ पहली बार स्कूल जाते वक्त रो भी रहे थे। क्लास में बैठे कई बच्चे ड्राइंग बना रहे थे तो कुछ स्कूल के मैदान में धमाल मचा रहे थे।












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