अन्‍ना हजारे ने अब मायावती से मिलने का समय मांगा

Anna Hazare
लखनऊ। दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ बैठक करने के बाद समाजसेवी अन्ना हजारे शनिवार को संप्रग अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात से पहले अन्‍ना ने अपनी अगली मुलाकात की योजना बना ली है। अगली मुलाकात मायावती से होगी, जिसके लिए अन्‍ना ने उनसे समय मांगा है।

देश की राजनीति में अहम भूमिका रखने वाले उत्तर प्रदेश में लोकपाल विधेयक पर समर्थन जुटाने के लिए अन्ना लखनऊ आएंगे। अन्ना ने मायावती से मिलने का समय मांगा है ताकि वे मायावती के साथ लोकपाल बिल पर चर्चा कर उनकी राय जान सकें।

दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देकर केन्द्र सरकार को हिला देने वाले अन्ना हजार अब लोकपाल के निर्माण में जुटे हैं। अपने साथियों के साथ अन्ना घूम-घूमकर समर्थन जुटा रहे हैं। इसी समर्थन के तहत अन्ना हजारे ने शुक्रवार को भाजपा नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक की। बैठक में लालकृष्ण आडवाणी, वेंकैया नायडू व सुषमा स्वराज समेत सभी वरिष्ठi नेता उपस्थित थे।

सूत्र बताते हैं कि बैठक में श्री हजारे को भाजपा का पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया। भाजपा के बाद अन्ना शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
से मुलाकात करेंगे। सोनिया गांधी ने अन्ना को शनिवार शाम चार बजे मुलाकात का समय दिया दिया है इस दौरान अन्ना लोकपाल विधेयक के विषय में उनका पक्ष जानेंगे तथा अपनी तर्क पेश करेंगे। सोनिया गांधी द्वारा समय दिए जाने के बाद अन्ना यूपी की मुख्यमंत्री मायावती से मुलाकात करना चाहते हैं।

इसके लिए उन्होंने मायावती से मुलाकात का समय मांगा है ताकि विधेकय पर चर्चा की जा सके। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री मायावती की ओर से अभी तक समय नहीं दिया गया है। उधर खबर है कि श्री हजारे रविवार की सुबह तक सुश्री मायावती से मिलना चाहते हैं क्योंकि इस मुद्दे पर तीन जुलाई को केन्द्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलायी है यदि इससे पूर्व उनकी वार्ता नहीं हो पाती है तो फिर वार्ता का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

गौरतलब है कि जन लोकपाल विधेयक पर सुश्री मायावती अपना मत पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं। बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष सुश्री मायावती पहले ही यह कह चुकी हैं कि केन्द्र की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में श्री हजारे के मन मुताबिक लोकपाल विधेयक पारित होना नामुमकिन है। उन्होंने श्री हजारे को सलाह दी थी कि वह अपनी सिविल सोसायटी के साथ इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएं तथा वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में ऐसे सांसदों को जितवाने का प्रयास करें जो जन लोकपाल विधेयक का समर्थन करते हों। इसके बाद ही विधेयक संसद में पारित हो जाएगा।

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