भाजश का भाजपा में विलय, एमपी में भाजपा मजबूत

ज्ञात हो कि राज्य में भाजश के अस्तित्व में आने के बाद भाजपा में कुछ बिखराव हुआ था। पार्टी को अपना वोट बैंक बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड रहा था। कई बार भाजश ने भाजपा के लिए मुसीबतें खड़ी करने का काम किया। वहीं, पिछले विधानसभा चुनाव में तो कई स्थानों पर चुनाव नतीजों को प्रभावित करने के साथ भाजश के पांच उम्मीदवार जीत दर्ज करने में भी सफल रहे थे।
आपको बताते चलें कि बुधवार से पहले तक राज्य विधानसभा में भाजपा के कुल 145 विधायक हुआ करते थे मगर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद उनकी पार्टी का जो विलेय हुआ है उसके बाद विधायकों की संख्या 150 हो गई है। एक तरफ जहां भाजश के पांच विधायकों ने भाजपा की विधायक संख्या बढ़ाई है, वहीं दमोह के जबेरा विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में दशरथ लोधी ने जीत दर्ज कर विधायकों की संख्या 151 पर पहुंचा दिया।
ऐसे में दोनों पार्टियों के आपस में विलेय होने पर भाजपा ने जो मध्य प्रदेश में अपनी मजबुती के झंडे तो गाड दिये है मगर यह विलेय भाजपा को किस स्तर तक ले जायेगा उसका अंदजा अभी से लगा पाना मुश्किल है। मालूम हो कि उमा भारतीय ने कुछ दिन पूर्व ही भाजपा का साथ पकड़ा है और उत्तर प्रदेश में आगामी चुनाव के लिये तैयारियां शुरु कर दी है। मगर क्या मध्य प्रदेश के मजबुती भाजपा को उत्तर प्रदेश में मजबूत कर सकेगी तो आने वाला वक्त बताएगा।












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