लोकपाल पर सर्वदलीय बैठक से पहले संप्रग व अन्‍य दलों में मतभेद

Manmohan Singh, Sonia Gandhi
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाए जाने के पेंचीदा मामले पर अनिर्णय की स्थिति के बीच सरकार सभी राजनीतिक दलों के विचार जानने के लिए जल्द ही सर्वदलीय बैठक बुला सकती है। अन्ना हजारे के नेतृत्व में सिविल सोसाइटी के सदस्यों और सरकार में गहराते मतभेद के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ हुई बैठक में सर्वदलीय बैठक बुलाने पर यह फैसला हुआ। खास बात यह है कि कांग्रेस के सहयोगी दलों की राय भी मनमोहन के साथ नहीं है।

लोकपाल और तेलंगाना जैसे अन्य संवेदनशील मुद्दों को लेकर सोनिया के नेतृत्व वाले कांग्रेस कोर ग्रुप की शनिवार को यहां बैठक हुई। इससे पहले यानी शुक्रवार की रात में भी कोर ग्रुप में दो घंटे तक चर्चा हुई थी। हजारे और उनके सहयोगी संयुक्त मसौदा समिति की बैठक के दौरान प्रस्तावित लोकपाल विधेयक में प्रधानमंत्री और शीर्ष अदालतों को शामिल करने पर जोर दे रहे हैं।

इस समिति की अब 20 और 21 जून को बैठक होने वाली है। सरकार प्रथम दृष्टया प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाए जाने का विरोध कर रही है, लेकिन वह इस बात पर विचार करने को तैयार है कि प्रधानमंत्री पद से हट जाने के बाद वह व्यक्ति इसकी परिधि में लाया जा सकता है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार की प्रथम दृष्टा राय है कि प्रधानमंत्री को लोकपाल दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यदि वह अपना कार्यालय छोड़ देते हैं तो उन्हें अभियोजन से मुक्त नहीं किया जाना चाहिए।

उधर, टीम अन्ना के साथ लोकपाल पर उभरे मतभेद के बाद सरकार सर्वदलीय बैठक का सहारा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश भले कर रही हो, मगर मुख्य विपक्षी दल भाजपा आगे बढ़कर कंधा देने को तैयार नहीं है। पार्टी नेता वेंकैया नायडू ने कहा है कि सर्वदलीय बैठक पर औपचारिक निमंत्रण आने के बाद पार्टी अपना रुख तय करेगी। वहीं माकपा के डी राजा ने कहा है कि सर्वद‍लीय बैठक में विचार नहीं रखेंगे, अपना स्‍टैंड संसद के अंदर रखेंगे।

प्रधानमंत्री को प्रस्तावित लोकपाल बिल के दायरे में लाने के मुद्दे पर संप्रग के सहयोगियों में मतभेद सामने आ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जहां प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने का विरोध कर रही है, वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम प्रधानमंत्री को दायरे में लाने के खिलाफ नहीं है।

राकांपा के प्रवक्ता डी.पी. त्रिपाठी ने कहा कि उनकी पार्टी नहीं चाहती कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाया जाए। त्रिपाठी ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा बनाए रखनी होगी। वह देश के खुफिया एवं विदेशी मामलों से जुड़े कई गोपनीय मामलों को देखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को विधेयक के दायरे में लाने से देश की प्रणाली कमजोर होगी। डीएमके प्रवक्ता

टीकेएस एलंगोवन ने हालांकि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के खिलाफ नहीं है।

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