लखनऊ में मुख्य सचिव के पड़ोसी के घर पर अवैध कब्जा

राजधानी के पॉश इलाके गोमती नगर में दबंग कब्जा करने पहुंच गए। प्रदेश में अपराधियों के बढ़ते हौंसले का ही परिणाम है कि कब्जा करने पहुंचे दबंगों ने चोरी से मकान की फर्जी रजिस्ट्री तक तैयार करवा ली थी। विवेक खण्ड डी1/875 में रहने वाली मालविका सरकार एक सप्ताह के लिए शहर से बाहर गयी हुई थीं। मालविका के कुछ करीबी रिश्तेदार पेपर मिल कालोनी में भी रहते है। रात करीब तीन बजे कुछ लोगों ने उनके मकान का ताला तोड़ा और भीतर प्रवेश कर गए। मकान पर कब्जा करने वाले अजीत कुमार सिंह व उसके चार साथी सवेरे तक मकान में आते जाते रहे।
सवेरे जब पड़ोसियों ने देखा की मकान का ताला खुला हुआ है और बाहर एक सफारी खड़ी है तथा कुछ लोग भीतर हैं। यह जानने के बाद पड़ोसियों ने पेपर मिल स्थित मालविका के रिश्तेदारों को मामले की जानकारी दी। उन लोगों ने जब मामले की तहकीकात की तो पता चला कि मकान पर कुछ लोगों का कब्जा हो चुका है तो उनके होश उड़ गए। लोगों ने कब्जे की जानकारी मालविका व पुलिस को दी। पुलिस आनन-फानन में मौके पर पहुंची तो पता चला कि वास्तविक तौर पर कुछ लोग अवैध रूप से मकान के भीतर है तथा मकान का तोड़ा गया है।
पुलिस ने अजीत कुमार सिंह व उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया। गिर तार होने वालों में योगेन्द्र प्रताप सिंह, वीरेन्द्र प्रताप सिंह, दिनेश यादव व पंचराज शर्मा प्रमुख हैं। पुलिस ने गिर तार लोगों के पास से एक लाइसेंसी रिवाल्वर व सफारी (यूपी-32 जीके-2801) बरामद की। गिरोह के सरगना अजीत ङ्क्षसह ने पूछतांछ के दौरान एक रजिस्ट्री भी पेश की जिस पर मालविका सरकार का फोटो व हस्ताक्षर थे।
रजिस्ट्री में मालविका सरकार का जो फोटो था वह किसी और का था। अजीत सिंह ने बताया कि उसे यह प्रापर्टी अभिनव तिवारी नाम के वकील ने दिखायी थी। सूत्रों का कहना है कि अभिनव तिवारी नाम का व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी से संबन्धित है। पूरे मामले का दिलचस्प पहलू यह रहा कि जिस मकान पर कब्जा किया गया वह मकान मु य सचिव उत्तर प्रदेश शासन अनूप मिश्रा के मकान के बगल में था बावजूद इसके दबंगों ने उस पर कब्जा कर लिया।












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