भूमि अधिग्रहण में केन्द्र से अधिक मुआवजा देती है यूपी सरकार

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि जमीन अधिग्रहण की नीति देश की सबसे प्रगतिशील तथा किसानों के हित की नीति है। सरकार का कहना है कि नोएडा में प्रति एकड़ 44 लाख, ग्रेटर नोएडा में प्रति एकड़ 36 लाख तथा यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण में 22 लाख से 35 लाख प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया गया। सरकार का कहना है कि भट्टा पारसौल में धरने पर बैठे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी तथा दिग्विजय सिंह ने किसानों की जमीन का मुआवजा हरियाणा की तर्ज पर देने की बात कही थी जबकि प्रदेश में अधिग्रहण की जो प्रक्रिया अपनायी गयी वह हरियाणा से बेहतर है। प्रवक्ता ने कहा कि कुछ राजनीतिक लोग किसानों को गुमराह कर रहे हैं तथा सरकार के खिलाफ किसानों को भड़का रहे हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि नोएडा प्राधिकरण में वर्ष 2006-07 में प्रति एकड़ बीस लाख रुपये मुआवजा दिया गया जिसे सरकार ने बढ़ाकर दो गुना कर दिया। उन्होंनें कहा कि इन दरों की तुलना में रेल मंत्रालय ने जब रायबरेली के लालगंज में किसानों की जमीन अधिग्रहीत की तो किसानों को नाम मात्र का मुआवजा दिया। ज्ञात हो कि रायबरेली के लालगंज में बनाये जा रहे रेल कोच कारखाने के लिये डलमउ में जो जमीन किसानों से ली गयी उसके लिए किसानों को 2.90 लाख रुपये से 4.35 लाख रुपये प्रति एकड़ ही मुआवजा प्रदान किया गया।
प्रवक्ता का कहना था कि लालगंज में तो मुआवजे की राशि 3.70 लाख रूपये ही रखी गयी थी। उत्तर प्रदेश की पुनर्वास और पुनस्र्थापना नीति अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर है। राज्य सरकार ने किसी कंपनी के लिये जमीन अधिग्रहण में वाॢषक सहायता के रूप में 25 प्रतिशत तक के शेयर लेने का विकल्प तय किया है। इसके साथ ही विकास के लिये ली गयी जमीन पर सात प्रतिशत विकसित जमीन किसानों को ही देने का प्रावधान है। यदि किसी किसान के पास जमीन कम है तथा अधिग्रहण के बाद उसके जमीन नहीं रह जाती है तो परिवार के एक सदस्य हो कम्पनी में नौकरी भी दिए जाने का प्राविधान है। सरकार का कहना है कि यदि किसी आवासीय परियोजना के लिए किसानों की जमीन ली जाती है तो योजना में 17.5 प्रतिशत भूखण्ड किसानों के लिए आरक्षित किए जाते हैं।












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