मायावती ने गिनायी सरकार की उपलब्धियां

उत्तर प्रदेश की मु यमंत्री मायावती ने गत 30 सित बर को आए आयोध्या फैसले के लिए राज्य में रही शांति को अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य कानून व्यवस्था उनकी प्राथमिकताओं में सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य की सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति चाहे वह कोई बड़ा नेता भी क्यों न हो यदि कानून को हाथ में लेगा तो उस पर स त कार्रवाई करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी। उन्होंने बताया कि उनके शासन काल में किस प्रकार बड़े व दर्दान्त अपराधी कानून के हत्थे चढ़े। अपराधियों ने चार अरब 43 करोड़ रपये से अधिक की स पत्ति जब्त की गई।
सुश्री मायावती ने कहा चार वर्षों में प्रदेश में विकास और कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए सरकार ने जो कार्र्य किए वे पिछले चालीस वर्षों में नहीं हो पाए थे। इस अवसर पर उन्होंने केन्द्र सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि केन्द्र ने राजनीतिक द्वेष और स्वार्थ के कारण उत्तर प्रदेश की उपेक्षा की। उन्होंने कहा कि केन्द्र से समय पर धन नहीं मिलने की वजह से राज्य का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने गत 30 अप्रैल को बुन्देलखण्ड के लिए जिस पैकेज का एलान किया वह राजनीति से प्रेरित था। उन्होंने कहा क्या बुन्देलखण्ड कुछ ही दिनों में पिछड़ गया वहां के हालत कई वर्षों से ऐसे हैं तो फिर आजादी के बाद वहां विकास के अभियान क्यों नहीं चलाये गए।
सुश्री मायावती ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि चार वर्षों में विकास कार्यों पर खर्च 19 हजार करोड़ से बढ़कर 47 हजार करोड़ रुपये हो गया जबकि स्पेशल क पोनेंट प्लान में यह खर्च 3100 करोड़ से बढकर 9140 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट पब्लिक भागीदारी के तहत भी उनकी सरकार ने राज्य के विकास में कई ठोस आयाम स्थापित किये। उन्होंने कहा कि स्मारकों, पार्कों को लेकर अक्सर लोग सरकार की आलोचना करते हैं जो गलत है। जातिवादी मानसिकता के कारण दलित और पिछड़ जाति के महापुरूषों को उचित स मान नहीं मिला था जो उनकी सरकार ने दिया। इस कार्र्य में कुल बजट का मात्र एक प्रतिशत धन ही खर्च किया गया है। जबकि आने वाले समय में इन्हीं स्मारकों से सरकार को आय होगी। उन्होंने कहा कि दलितों की तरक्की हेतु 37 हजार करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है।
सुश्री मायावती ने कहा कि लोगों को बेरोजगारी भत्ता देने की बजाय उन्हें रोजगार उपलब्ध कराए जाने पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न विभागों में नियुक्त कर्मचारियों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में सभासदों से मेयरों और नगरपालिका अध्यक्षों को चुनने की व्यवस्था है लेकिन यही व्यवस्था जब वह उत्तर प्रदेश में लागू करने की कोशिश की गयी तो कुछ लोगों को यह बेहतर नहीं लगा। उन्होंने पूर्वांचल और बुन्देलखण्ड को अलग राज्य बनाये जाने की वकालत की।












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