गुप्तचर अधिकारियों के लिए मुसीबत का पहाड़ लाये राहुल

सूत्रों की माने तो राहुल गांधी के भट्टा पारसौल पहुंचने से बसपा सरकार को जो परेशानी उठानी पड़ी उसकी जि मेदार वे एजेन्सियां है जिनके जि मे जिले की सुरक्षा व्यवस्था है। राजधानी में बैठे प्रशासनिक अधिकारियों ने जिले की एलआईयू व अन्य सुरक्षा एजेन्सियों को फटकार लगाते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय स्तर का नेता जिले के भीतर संवेदनशील स्थान पर पहुंच जाता है और उन्हें कानों कान खबर नहीं होती। आखिर यह लापरवाही किस स्तर पर रही। प्रशासन ने तय कर लिया है जिले में तैनात अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने के मामले में कड़ी कार्यवाही होगी।
अधिकारियों का कहना है कि जब क्षेत्र में धारा 144 लगी थी तो एक साथ दर्जन भर दोपहिया वाहन किस प्रकार पहुंच गए किसी ने उन्हें देखा क्यों नहीं। गौरतलब है कि जब मोटर साइकिल से गांव पहुंचे तब भी किसी अधिकारी को पता नहीं चला। प्रशासनिक अधिकारियों को राहुल के आने की जानकारी उस वक्त लगी जब वे किसानों से मिल रहे थे तथा मीडिया को इसकी जानकारी हो चुकी थी।
श्री गांधी ने पांच घंटे तक पीडि़त किसानों एवं उनके परिजनों से बात की, बाद में वह पारसौल गांव की चौपाल पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गये। सूत्र बताते हैं कि सरकार ने तय किया है कि इस लापरवाही का खामियाजा सुरक्षा व्यवस्था में लगे अधिकारियों को भुगतना होगा जिसके लिए उच्च स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो गया। अगले दो दिनों के भीतर ही इस स बंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।












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