विदेशी सैलानियों की पसंद बना नवाबी शहर लखनऊ

पुराने ऐतिहासिक स्थलों के साथ राजधानी में अब कांशीराम स्मारक व अम्बेडकर स्मारक जैसे नवीन पर्यटन स्थल भी सैलानियों को लुभाने लगे हैं। ऐतिहासिक विरासत के साथ नवाबी तहजीब के लिए दुनिया में मशहूर लखनऊ शहर साल दर साल घरेलू ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रहा है। लखनऊ आने वाले विदेशी सैलानियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चला कि शहर की प्रसिद्धि दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
वर्ष 2004 में जहां 31, 166 विदेशी पर्यटक ने लखनऊ की सैर की तो वर्ष 2005 में यह संख्या बढ़कर 31, 520 हो गयी। यह बढ़त आगे भी जारी रही तथा 2006 में 32,921 विदेशी सैलानी लखनऊ आये। 2007 में यह आंकड़ा 35 हजार से ऊपर पहुंच कर 35, 353 हो गया। वर्ष 2008 में यह संख्या 35, 587 हो गयी। वहीं 2009 में 38,272 विदेशी पर्यटक लखनऊ आये तो 2010 में यह संख्या बढ़कर 43,471 हो गयी।
बहरहाल पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या से पर्यटन विभाग तो खुश है ही होटल व्यवसायियों का मुनाफा भी दो गुना हो चुका है। लखनऊ में छोट व बड़ा इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, रेजीडेन्सी, शहीद स्मारक, जामा मस्जिद, अकबरी गेट, गोल दरवाजा, सआदत अली का मकबरा, दिलकुशा गार्डेन आदि ऐतिसाहिक स्थल हैं और पर्यटक इन्हें देखने पहुंचते हैं। बीते कुछ सालों में लखनऊ में कांशीराम स्मारक, सामाजिक परिवर्तन स्थल और अम्बेडकर स्मारक जैसे आकर्षण के कई केन्द्र विकसित किये गये हैं जो लखनऊ के सौन्दर्य को बढ़ाते हुए पर्यटकों को भी अपनी ओर खींच रहे हैं।
अभी तक जहां लखनऊ आने में पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब समस्याएं दूर हो रही हैं। अधिकतर विदेशी पर्यटक दिल्ली, आगरा व वाराणसी होते हुए ही लखनऊ आते हैं। दिल्ली, आगरा व वाराणसी से लखनऊ को जुड़ाव बेहतर होने से पर्यटकों और आवगमन के साधन में बढ़ोत्तरी के चलते पर्यटकों का यहां आना अब आसान हो गया है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से उत्साहित पर्यटन विभाग अब पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाएं भी बढ़ाने की योजनाएं तैयार कर रहा है। उम्मीद जतायी जा रही है कि विभाग आने वाले समय में कुछ टूर पैकेज शुरू कर सकता है जिससे पर्यटकों को काफी आराम हो जाएगा।












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