तेलंगाना मार्च: हज़ारों हिरासत में

उमर फ़ारूक़
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य की मांग के पक्ष में अनेक संगठनों और राजनीतिक नेताओं के गुरुवार को बुलाए गए 'मिलियन मार्च' से पहले हज़ारों लोगों को हिरासत में ले लिया गया है. हैदराबाद और आसपास के ज़िलों में तेलंगाना के पक्षधरों के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर पुलिस कार्रवाई शुरु हो गई है और हैदराबाद तो जैसे पुलिस छावनी में बदल गया है. हैदराबाद को आने वाले तमाम रास्तों पर नाकेबंदी कर दी गई है.
हुसैन सागर झील के किनारे जहाँ तेलंगाना के समर्थकों ने जमा होना है, वहाँ पुलिस ने घेराबंदी कर ली है. पलिस के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों को भी तैनात कर दिया गया है. पुलिस पूरे क्षेत्र में बसों और रेल स्टेशनों पर नज़र रख रही है और जिस किसी पर भी तेलंगाना का समर्थक होने का संदेह है, उसे हिरासत में लिया जा रहा है.
इस विरोध कार्यक्रम की आयोजक तेलंगाना संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने एक लाख लोगों को हिरासत में लिया है और 10 हज़ार लोगों के केवल हैदराबाद में पकड़ा गया है.
समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोडंडा राम ने पत्रकारों को बताया, "मिस्र जैसे देश में तानाशाही के बावजूद लोगों को प्रदर्शन करने की इजाज़त थी लेकिन यहाँ लोकतंत्र होते हुए भी जुलूस निकलने और अपनी मांग रखने की अनुमति नहीं दी जा रही है. कम उम्र के बच्चों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है और चारों ओर भय का वातावरण पैदा कर दिया है. सरकार की ज़िद्द के कारण लोगों का गुस्सा भड़क रहा है और हमने तय किया है कि हम हैदराबाद में जमा होकर दिखाएँगे."
तेलंगाना के समर्थक संगठनों ने फिर तेलंगाना राज्य की मांग पर समर्थकों से हैदराबाद में जमा होने की अपील की है. उधर सरकार ने कहा है कि इस आयोजन को अनुमति इसलिए नहीं दी गई है क्योंकि इससे हिंसा भड़क सकती है और साधारण जनजीवन प्रभावित हो सकता है. इन संगठनों और कई राजनीतिक दलों का कहना है कि उनका कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहेगा और प्रदर्शनकारी भारतीय समयानुसार दोपहर बाद एक बजे से चार बजे तक धरना देंगे. लेकिन सरकार उनकी बात मानने को तैयार नहीं है.
इस कार्यक्रम को क्षेत्र के लगभग तमाम राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है. तेलंगाना राष्ट्रीय समिति, भारतीय जनता पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (एमएल-न्यू डेमोक्रेसी) ने इसका आहवान किया है. उधर कांग्रेस और तेलुगु देशम के विधायकों ने भी इस कार्यक्रम के समर्थन की घोषणा की है.
कांग्रेस के विधायकों और सांसदों ने भी पुलिस कार्रवाई की निंदा की है और कहा है यदि लोग भड़कते हैं तो जिम्मेदारी सरकार की होगी. मशहूर वामपंथी लोक गायक गदर ने कहा है की अगर हालात बिगड़े तो राज्य और केंद्र सरकार, राज्यपाल और पुलिस महानिदेशक ज़िम्मेदार होंगे.
अगर कांग्रेस के सांसद और विधायक इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं तो यह केंद्रीय कांग्रेस नेतृत्व के लिए शर्मिंदगी की बात होगी. तेलंगाना पर सरकार की हाल की ख़ामोशी से तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेस सांसदों और विधायकों में ख़ालसी नाराज़गी है. उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी घोषणा की है की वो कैंपस में जुलूस निकालेंगे और इसे रोकने के लिए भी व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. पुलिस अधिकारियों को आशंका है कि वहां हालात हिंसक मोड़ ले सकते हैं. रोड ट्रांसपोर्ट निगम के कर्मचारियों ने कहा है कि वे बाहर से आने वाले लोगों के लिए भोजन का प्रबंध करेंगे. अलग तेलंगाना राज्य के लिए संघर्ष का यह ताज़ा दौर कई सालों से चल रहा है लेकिन स्थिति इतनी विस्फोटक पहले कभी नहीं नज़र आई है.












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