'हताशाजनक, निराशाजनक आम बजट'

करों में छूट की सीमा में मामूली वृद्धि के सवाल पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा: “आप सबको तो खुश नहीं कर सकते. वित्त मंत्री ने वो किया जो संभव था और उन्होंने उस तबके का खयाल रखा है जो सबसे निचली सीढ़ी पर है." काले धन पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री ने कहा है इसमें क्षमादान योजनाओं का असर नहीं हुआ है और इसे रोकने के लिए एक समुचित प्रक्रिया को अपनाना होगा जिससे तंत्र में बदलाव लाया जा सके.
वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि इस बजट में आर्थिक सुधारों का अभाव दिखा है. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज का कहना है कि न तो बेरोज़गार युवकों का ख़याल रखा गया ना ही महिलाओं का. उन्होंने कहा कि सरकारी खर्चों में कटौती का कहीं कोई ज़िक्र नहीं किया गया है.
एनडीए के वित्तमंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने कहा कि जहां तक करों में छूट का सवाल है तो उन्होंने एक हाथ से दिया है दूसरे हाथ से वापस ले लिया है. लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस बजट को हताशाजनक और निराशाजनक बताया है. एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "बेरोज़गारी तो वित्त मंत्री के आंखों से ओझल हो गई, युवाओं को भारी निराशा हुई है वहीं महिलाएं जिनकी रसोई पर मार पड़ रही है उनपर भी ध्यान नहीं दिया गया है."
वहीं गृहमंत्री पी चिदंबरम जो पहले वित्त मंत्री रह चुके हैं उन्होंने इस बजट का स्वागत किया है. वाम देलों ने इसे भारत के सबसे असंवेदनशील बजट का नाम दिया है. वामपंथी नेता नीलोत्पल बसु का कहना है कि इस बजट में आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं है. सीपीएम नेता नीलोत्पल बसु ने एक टीवी चैनल पर दिए बयान में कहा, “इस बजट से एक बहुत छोटे तबके को फ़ायदा होगा, इसमें इनक्लूसिव ग्रोथ यानि देश के सभी तबकों के विकास की बात नज़र नहीं आई है."
उनका कहना है कि इसमें आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं है. वहीं सीपीआई के डी राजा ने कहा कि ये बजट पूंजीवाद में बढ़ावा देने की एक बड़ी कोशिश है और पूरा ध्यान औद्दोगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने पर है. मानव संसाधन और विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शिक्षा बजट में बढ़ोतरी की काफ़ी तारीफ़ की है. उन्होंने कहा, “इस बजट में व्यावसायिक शिक्षा विकास पर जो ज़ोर दिया गया है वो काबिलेतारीफ़ है." रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने भी बजट का स्वागत किया है.












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