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अमर चित्रकथा के जन्मदाता अंकल पाई का निधन

Amar Chitrakatha
एक जमाना था जब ना घरों में टीवी होता था, ना कंप्यूटर, ना इंटरनेट और ना ही वीडियो गेम। ये जमाना था जब घर में बच्चे कॉमिक्स और कहानियों की किताबें पढ़कर बड़े होते थे। 1970 और 80 के उस जमाने में तीन मुख्य कॉमिक्स पब्लिशर थे।

बेनेट एण्ड कोलमेन (टाईम्स ऑफ इंडिया) की कॉमिक्स इंद्रजाल जो कि सुपहीरो जैसे फैंटम, बहादुर और मैन्ड्रेक की कहानियों पर कॉमिक्स निकालते थे। दूसरा था अमरचित्र कथा या एसीके। अमर चित्रकथा ने पौराणिक कहानियों को कॉमिक्स का रुप देकर बच्चों के बीच खूब लोकप्रियता बटोरी।

तीसरी कॉमिक्स थी दक्षिण भारत से निकले वाली चंदा मामा। जिसमें विक्रम और बेताल के किस्से हुआ करते थे। भारत में कॉमिक्स को एक नया रुप देने में अनंत पाई का बड़ा योगदान रहा है। अमर चित्रकथा ने बहुत साल तक बच्चों को भारत की पौरणिक कहानियों से रुबरु करवाया। ये कॉमिक्स ना सिर्फ बच्चों के मनोरंजन का साधन थी बल्कि ज्ञान का सागर भी थी।

70 और 80 के दशक में अनंत पाई बच्चों के बीच अंकल पाई के नाम से मशहूर थे। अंकल पाई को मनोरंजन के साधन कॉमिक्स के जरिए बच्चों की हमारी पौराणिक कथाओं से जोड़ने वाला सूत्रधार कहा जा सकता। अनंत पाई को कॉमिक्स के क्षेत्र में दिए गए उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

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