सोच सही तो जीवन भी सही
नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। कोई भी उपलब्धि चाहे वह किसी फैसले, परियोजना, सम्बंधों या काम से जुड़ी हो, उसके लिए जानकारी सबसे पहला कदम होती है। यद्यपि हमारी सफलता का दिमाग से भी गहरा सम्बंध होता है। अगर हम कैरियर, वित्त, स्वास्थ्य, भावनाओं और सम्बंधों आदि जीवन के पहलुओं में सफलता व संतुलन चाहते हैं तो हमें अपने मस्तिष्क को शांत तथा सहज अवस्था में रखना होगा।
यह बहुत जरूरी है कि हमारे दिमाग से हमेशा सकारात्मक विचारों का ही संप्रेक्षण हो, लेकिन हमें इससे पहले इन विचारों को दिमाग में बिठाना होगा। प्रेरणादायक लोगों की संगति व अच्छी पुस्तकों के पठन-पाठन से यह संभव हो सकता है। एक पुरानी कहावत कम्प्यूटर के नियमों पर लागू होती है कि "कचरा डालोगे तो कचरा ही पाओगे।"
ऐसा ही हमारी सकारात्मक सोच व सफलता के साथ होता है। अगर हम दिमाग में नकारात्मक और असफलता से भरे विचार डालेंगे तो सफलता नहीं मिल पाएगी। हमारा प्रयास यही हो कि हम सफलता को अपने सामने रखें, तब हमारा चेतन और अवचेतन मस्तिष्क दोनों ही हमें सफलता की ओर ले जाएंगे और हम लक्ष्य के समीप होते चले जाएंगे।
ईश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को पूरी शक्ति दी है कि वह अपनी योग्यता, क्षमता व शक्ति के अनुसार चयन कर सके। वह किसी भी मुद्दे पर सोच-विचार के बाद ही चयन कर सकता है। शरीर की मांसपेशियों की लगातार कसरत से हमारी सेहत सुधरती है। जितनी कसरत करते हैं, सेहत उतनी ही अच्छी होती चली जाती है।
सफलता के साथ भी यही प्रक्रिया लागू होती है। जितना आप सफल होंगे, सफलता आपकी ओर खिंचती जाएगी। एक अवसादग्रस्त व्यक्ति कभी भी दूसरों को प्रेरणा नहीं दे सकता, क्योंकि उसका अपने ऊपर ही विश्वास नहीं होता। मैंने लेखक बनने की योजना नहीं बनाई थी। एक बार मैं 1997 में टीवी पर कारोबार के बारे में साक्षात्कार दे रहा था।
तब मुझे लगा कि मैं इस विषय पर लेख क्यों नहीं लिखता? मैंने लेख लिखा और वह प्रकाशित भी हुआ। इससे मुझे विश्वास हुआ कि मैंने जो लिखा था, वह छपने योग्य था। मेरे ज्यादातर लेख राष्ट्रीय स्तर के समाचार-पत्रों में छपने लगे। सफलता मेरे साथ थी और मुझे पीछे मुड़कर देखने का समय तक नहीं मिला। समाचारपत्रों के स्तंभों के अलावा मैं अब तक 20 पुस्तकें लिख चुका हूं।
सफलता के लिए अपने दिमाग को सही ठिकाने पर और सेहतमंद रखना बहुत जरूरी होता है। ऐसा तभी संभव है जब आपमें नियमित रूप से सही चयन व फैसला करने की हिम्मत हो। आप जो भी करें, मान कर चलें कि आपका हर काम आपको सफलता और विजय की ओर ले जा रहा है। आपके दिमाग में सदा यही विचार होना चाहिए कि आप एक योग्य और भले व्यक्ति हैं। केवल उसी विचार को अपने पास रखें जो एक बेहतर इंसान के रूप में उपलब्धियों तक ले जाने की क्षमता रखता हो।
आपको प्रतिदिन अपने दिमाग में अच्छे विचारों को प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि काम की पूर्णता व उपलब्धि के लिए आपको प्रोत्साहन मिल सके। साथ ही दिमाग में व्यर्थ की बातों व कूड़े-कचरे को निकालना भी जरूरी है। आपके दिमाग में केवल आशावादी विचारों को ही स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि सकारात्मक विचार व प्रेरणा ही आपको बेहतर व्यक्तित्व बनाती है।
केवल उत्साहवर्धक विचार ही आपको अपने लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। मेरा निजी अनुभव तो यही कहता है कि जितने समय में हम नकारात्मक विचारों को दिमाग में स्थान देते हैं, उतने ही समय में सकारात्मक विचार दिमाग में बिठाए जा सकते हैं, नहीं तो कुछ भी अच्छा सोचने की बजाय दिमाग बुरी कल्पनाओं में खोया रहता है, इसलिए कुछ अच्छा सोचने की योजना क्यों न बनाई जाए? हम अपने दिमाग में जो भी सोचते हैं, वह किसी न किसी रूप में कर्म बनकर हमारे सामने आ जाता है।
बड़ी हैरानी की बात है कि सफलता चाहने वाले किस तरह अपने दिमाग में नकारात्मक बातों को बसाए रखते हैं। इस तरह उनकी सफलता की राह में रुकावट आ जाती है। पहले तो वह स्वयं ही हीनभावना से घिरे रहते हैं, जब कुछ करना भी चाहते हैं तो नकारात्मकता उन्हें आगे बढ़ने ही नहीं देती।
यह सब दिमाग में कूड़ा-कचरा यानी व्यर्थ के विचारों को भरने का ही नतीजा होता है। ऐसा दिमाग कभी भी कुछ नहीं पा सकता। आप जो भी पढ़ते, देखते या सुनते हैं, उसका मूल्यांकन अवश्य करें क्योंकि यही सब आपके दिमाग में जाकर बस जाता है। जीवन बहुत छोटा है। हमारे पास इस पृथ्वी पर रहने के लिए ज्यादा समय नहीं है।
हम बेकार की बातों में अपना कीमती समय क्यों बर्बाद करें? आप निश्चित करें कि कहीं आपका संगीत आपको आपके उद्देश्य से दूर नहीं ले जा रहा है? यह एक सीधा-सा सवाल है जो आपके सोचने-समझने की शक्ति को क्षमतावान बनाता है और उसकी छंटाई करता है।
मैं इस विषय में पूरी तरह सजग हूं और अपने आपको इन बुराइयों से दूर रखने का प्रयास करता हूं, इसलिए मैं केवल आनंदायक पुस्तकें पढ़ता हूं, ऐसे टीवी कार्यक्रम देखता हूं जिनमें रोने-धोने का कोई काम नहीं होता हो। यह भी खुश रहने का एक अच्छा तरीका है।
वास्तव में मैं बहुत कम टीवी देखने की कोशिश करता हूं, ताकि मुझे अपने अधूरे काम पूरे करने के लिए ज्यादा से ज्यादा समय मिले। हम कितना व्यायाम करते हैं, क्या खाते हैं और कितनी नींद लेते हैं, इसका हमारे साथ गहरा सम्बंध होता है। शारीरिक तंदुरुस्ती भी हमारे मन को प्रभावित करती है, लेकिन एक सकारात्मक मस्तिष्क हमें किसी भी चुनौती या हालात का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रखता है।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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