ममता ने रेल बजट पेश करना शुरू किया

यूपीए-2 के शासनकाल में ममता बनर्जी का ये तीसरा रेल बजट है.
रेल मंत्री ममता बनर्जी संसद में साल 2011-12 का रेल बजट पेश कर रही हैं जिसे उनके अबतक के राजनीतिक भविष्य का सबसे चुनौती भरा बजट माना जा रहा है.
एक ओर उन्हें रेल की चरमराई आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाना है वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव दस्तक दे रहे हैं.
ममता बनर्जी ने कहा है कि ये बजट ‘आम आदमी के लिए सुखद होगा.’
रेल अभी आर्थिक तंगी से जूझ रहा है.
देश में सबसे ज़्यादा नौकरियां देने वाली भारतीय रेल के खर्चों में 1,300 करोड़ की बढ़त आई है वहीं उसकी कमाई 1,100 करोड़ रूपए कम हो गई है.
इस आर्थिक तंगी से कई ऐसे कई कार्यक्रमों पर असर पड़ा है जिसकी बदौलत ममता बनर्जी और नौकरियां पैदा करके राजनीतिक पूंजी बनाने की कोशिश करती रही हैं.
योजना आयोग लंबे समय से रेल मंत्रालय पर किराए और सामान के भाड़े में दोतरफ़ा सब्सिडी कम करने का दबाव बना रहा है.
ईंधन के बढ़ते दामों और मंहगाई भत्ते की वजह से रेल कर्मचारियों का वेतन बढ़ रहा है और योजना आयोग की दलील है कि घाटा कम करने के लिए भाड़े में बढ़ोतरी ज़रूरी है.
रेल मंत्री की सबसे बड़ी चुनौती है बिना भाड़ा बढ़ाए दुनिया की सबसे बड़ी रेल सेवा को पटरी पर बनाए रखना.
ममता बनर्जी की उम्मीद टिकी है वित्त मंत्रालय पर लेकिन मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार उन्हें 20,000 करोड़ तक की बजट सहायता मिल सकती है. उनकी मांग 39,600 करोड़ की है.












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