रेल बजट: मुम्बई में मिलीजुली प्रतिक्रिया
मुम्बई, 25 फरवरी (आईएएनएस)। मुम्बईवासियों ने शुक्रवार को पेश हुए रेल बजट पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। बजट में मुम्बई के उपनगरीय इलाकों के लिए और रेलगाड़ियां शुरू किए जाने व बोगियों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है।
कुछ लोगों ने जहां इस बजट की तारीफ की है वहीं कुछ लोग मुम्बई की समस्या के हल के लिए इन प्रस्तावों को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं।
मुम्बई सबअर्बन रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक गांधी कहते हैं, "मुम्बई के उप नगरीय यात्रियों को इस बजट से बिल्कुल भी फायदा नहीं होगा। उप नगरीय यात्रियों के लिए राहत की कोई बात नहीं है क्योंकि हर दिन यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए रेलगाड़ी सेवाएं बढ़ाने की दिशा में कुछ नहीं किया गया है।"
उन्होंने कहा, "आदर्श रूप में बांद्रा से विरार तक के लिए अधिक रेलगाड़ियां शुरू किए जाने की आवश्यकता थी लेकिन ज्यादातर रेलगाड़ियां चर्चगेट (दक्षिण मुम्बई) से चलेंगी और 20 से ज्यादा स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। इससे रेलगाड़ियों में भीड़ बढ़ेगी जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाएं हो सकती हैं।"
मुम्बई प्रवासी रेलवे संघ के अध्यक्ष मधु कोटियन कहते हैं कि केवल 47 रेलगाड़ियों से हर दिन यात्रा करने वाले 7,000,000 यात्रियों को कोई मदद नहीं मिलेगी।
उन्होंने कहा, "मैं हार्बर लाइन पर चलने वाली सभी 107 रेलगाडियों में बोगियां नौ से बढ़ाकर 12 किए जाने की तारीफ करता हूं।" उन्होंने कहा कि इससे लोगों के कामकाज के लिए निकलने और घर लौटने वाले समय पर यात्रियों की भीड़ कम करने में मदद मिलेगी।
वैसे कोटियन ने रेल लाइनों के नजदीक रहने वाले झुग्गी-बस्ती निवासियों को घर उपलब्ध कराए जाने के निर्णय पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "यह प्रस्ताव स्पष्ट नहीं है। इसमें यह नहीं बताया गया कि क्या केवल मुम्बई में ही ऐसा होगा या यह योजना पूरे देश के लिए है।"
मुम्बई यात्री संघ के अध्यक्ष सुभाष गुप्ता ने रेल बजट को संतुलित बताया। गुप्ता ने कहा, "इस बजट में सभी वर्गो और राज्यों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है। तथ्य यह है कि किराया नहीं बढ़ाया गया है जो प्रशंसनीय बात है।"
वैसे हर दिन लोकल ट्रेनों की यात्रा करने वाले लोग खुश नहीं हैं। जनसम्पर्क व्यवसायी अनुकूल भावसार हर दिन लोकल ट्रेन से 40 किलोमीटर की यात्रा करते हैं और वह कहते हैं सेंट्रल लाइन पर तेज गति रेलगाड़ियों की संख्या बढ़ाए जाने की आवश्यकता थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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