नक्सलियों की कैद से रिहा हुए जिलाधिकारी (लीड-3)
अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों ने चित्रकोंडा इलाके में एक गांव के समीप जिलाधिकारी को कुछ चुनिंदा मीडियाकर्मियों को सौंपा। नस्कलियों ने गत 16 फरवरी को इसी स्थान से जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर पबित्र मोहन माझी को अगवा किया था। उन्होंने जूनियर इंजीनियर को बुधवार को रिहा कर दिया था।
जिलाधिकारी की रिहाई हो जाने से राज्य सरकार को एक बड़ी राहत मिली है क्योंकि नक्सलियों ने जिलाधिकारी की रिहाई के लिए बुधवार को अपनी नई मांगें रख दी थीं।
उनकी नई मांगों में से एक पर सहमत होकर राज्य सरकार ने गुरुवार सुबह दो मध्यस्थ जी. हरगोपाल और दंडपाणि मोहंती को नक्सलियों से बातचीत के लिए मलकानगिरी भेजा। दोनों मध्यस्थ हेलीकॉप्टर से कोरापुट गए थे। कोरापुट में हेलीकॉप्टर से उतकर उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर जाकर नक्सलियों से बातचीत करनी थी।
बुधवार शाम अपहृत इंजीनियर पवित्र मोहन माझी को रिहा करने के बाद जिलाधिकारी की रिहाई के लिए नक्सलियों ने सरकार के समक्ष कुछ और मांगें रख दी थीं। नक्सलियों की नई मांगों में मध्यस्थों द्वारा मलकानगिरी के घने जंगलों में जाकर उनसे बातचीत करना भी शामिल था। पहले मध्यस्थों ने इससे इंकार कर दिया था।
इंजीनियर और जिलाधिकारी को नक्सलियों ने 16 फरवरी को अगवा कर लिया था। सरकार नक्सलियों की 14 मांगें पहले ही मान चुकी है। नक्सलियों ने जिलाधिकारी की रिहाई के लिए गुरुवार शाम तक की समय सीमा तय की थी। नक्सली अपने कुछ और नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे थे।
गांति प्रसादम सहित नक्सलियों के कुछ नेताओं को पहले ही अदालत से जमानत मिल चुकी है। लेकिन गांति प्रसादम ने जमानत मिलने के बावजूद बुधवार को यह कहते हुए जेल में ही रहने की बात कही थी कि जब तक विभिन्न जेलों में नक्सली गतिविधियों में बंद 600 लोगों को नहीं छोड़ा जाता, वह जेल से नहीं जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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