गोधरा कांड : जिसने लिखी नरसंहार की नई दास्तां
मंगलवार को अहमदाबाद की विशेष अदालत ने ये ऐलान किया कि ये नर संहार एक सोची समझी साजिश थी, जिसने किसी रची थी इस बात का खुलासा तो नहीं हुआ नहीं लेकिन कोर्ट ने इस विष्य पर 31 आरोपियों को दोषी ठहरा दिया और 63 आरोपियों सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। दोषियों को सजा 25 फरवरी को सुनाई जायेगी।
आईये जानते हैं इस नरसंहार के बारे में ...गुजरात में वर्ष 2002 में हुए गोधरा कांड मामले के घटनाक्रम कुछ इस प्रकार हैं :
27 फरवरी, 2002 : अयोध्या से अहमदाबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस की बोगी संख्या एस-6 पर गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन के पास भीड़ का हमला, जिसमें 59 लोग मारे गए।
22 मई, 2002 : जांच एजेंसी ने पहला आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें अपराध को आतंक निरोधी अधिनियम (पोटा) के प्रावधानों के तहत नहीं शामिल किया गया।
19 दिसम्बर, 2002 : दूसरा अनुपूरक आरोप पत्र दाखिल। इसमें भी अपराधों को पोटा के प्रावधानों के तहत नहीं शामिल किया गया।
मार्च 2003 : मामले की सुनवाई के लिए विशेष पोटा अदालत गठित की गई।
16 अप्रैल, 2003 : तीसरा अनुपूरक आरोप पत्र दाखिल। आरोपियों को पोटा के प्रावधानों के तहत आरोपित किया गया।
21 नवम्बर, 2003 : सर्वोच्च न्यायालय ने गोधरा कांड सहित 2002 के साम्प्रदायिक दंगों के नौ मामलों की जांच पर रोक लगाई।
सितम्बर 2004 : पोटा समीक्षा समिति गुजरात पहुंची।
16 मई, 2005 : पोटा समीक्षा समिति ने अपनी राय सौंपी।
अप्रैल 2008: सर्वोच्च न्यायालय ने जांच से रोक हटाई और मामले की जांच के SIT गठित किया
12 फरवरी, 2009 : गुजरात उच्च न्यायालय ने गोधरा कांड मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ पोटा के आरोपों को रद्द कर दिया।
अप्रैल 2009 : सर्वोच्च न्यायालय ने गोधरा कांड मामले सहित 2002 के दंगे के नौ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष त्वरित अदालत गठित करने का आदेश दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.आर.पटेल को मामले की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया।
जून 2009 : विशेष अदालत ने गोधरा मामले की सुनवाई शुरू की।
30 मई, 2010 : विशेष अदालत के न्यायाधीश ने गोधरा रेलवे स्टेशन के पास घटना स्थल का दौरा किया।
28 सितम्बर, 2010 : विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित किया।
24 जनवरी 2011 : गोधरा मामले में फैसले की तारीख 19 फरवरी तय की गई, बाद में इसे 22 फरवरी कर दिया गया।
25 जनवरी, 2011 : सर्वोच्च न्यायालय का गोधरा मामले के फैसले पर रोक लगाने से इंकार।
22 फरवरी, 2011 : अहमदाबाद स्थित विशेष त्वरित अदालत ने गोधरा मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया और 63 लोगों को बरी कर दिया।













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