उत्तराखण्ड में जच्चा-बच्चा को घर भी छोड़ेगा अस्पताल का वाहन
नियम के मुताबिक प्रसव के बाद महिला और बच्चे को 48 घंटे तक अस्पताल में रहना अनिवार्य होगा। इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए शुरुआती दौर में 61 वाहनों को शामिल किया जाएगा।
ईएमआरआई-108 सेवा के उत्तराखण्ड प्रमुख अनूप नौटियाल ने मंगलवार को बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत चलने वाली इस योजना में ईएमआरआई के 61 वाहनों को शामिल किया जाएगा। ये वाहन एम्बुलेस से अलग तरह के होंगे और इसमें सिर्फ वाहन चालक होगा।
उन्होंने बताया कि ईएमआरआई-108 सेवा ने उत्तराखण्ड में पिछले ढाई साल में करीब 90 हजार प्रसव के मामलों में गर्भवती महिलाओं को सहायता पहुंचाई है और 2000 से अधिक बच्चों का जन्म 108 एम्बुलेंस में हुआ है। उन्होंने बताया कि अब तक की व्यवस्था के अनुसार ईएमआरआई-108 सेवा के वाहन गर्भवती महिला को उसके घर से अस्पताल ले जाने का कार्य करते थे, लेकिन अब जच्चा-बच्चा को घर तक छोड़ने की योजना की शुरुआत भी की जा रही है।
नौटियाल ने बताया कि 108 के पास अभी तक 108 एम्बुलेंस हैं। जल्द ही इसकी संख्या बढ़कर 139 होने वाली है। नई योजना के शुरू होते ही 61 वाहनों को शामिल करने पर यह संख्या 200 तक पहुंच जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना में जो वाहन लगाए जाएंगे, वे एम्बुलेंस न होकर सामान्य वाहन होंगे।
नौटियाल ने कहा कि ईएमआरआई-108 सेवा को जल, थल और वायु सेवा से जोड़ने की कवायद भी चल रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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