लीबिया में प्रदर्शनकारियों पर लड़ाकू विमान से हमला (लीड-2)

इस बीच भारत ने कहा कि लीबिया में पल-पल बदल रही स्थिति पर उसकी लगातार नजर है। सरकार वहां फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम कर रही है। उधर देश में हिंसा के विरोध में स्वीडन स्थित लीबिया के दूतावास के तीन कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया है।

ट्यूनीशिया और मिस्र के बाद लीबिया में सत्ता विरोधी प्रदर्शन पिछले 14 फरवरी को शुरू हुआ था और उसके बाद से प्रदर्शकारी लगातार राजधानी, दूसरे प्रमुख शहर बेनघाजी सहित विभिन्न शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स वाच के मुताबिक इन हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 300 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि अपुष्ट सूत्रों के मुताबिक कम से कम 400 लोगों की मौत हुई है।

समाचार चैनल अल जजीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि लीबिया में जारी आंदोलन को कुचलने के लिए सोमवार को शासन ने प्रदर्शनकारियों पर लड़ाकू विमान और हथियारों से हमला किया।

सरकार में एक प्रमुख हस्ती के रूप में शामिल गद्दाफी के बेटे सेफ-अल-इस्लाम (38) ने एक दिन पहले कहा था कि अगर प्रदर्शनकारी सरकार द्वारा सुझाए गए सुधार कार्यक्रम से सहमत नहीं होते हैं रक्तरंजित गृह युद्ध की शुरुआत हो जाएगी।

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक दो पायलटों ने बमबारी करने से इंकार करते हुए विमान को नीचे उतार दिया। खबर है कि दो पायलटों ने माल्टा में राजनीतिक शरण की गुहार लगाई है।

खबर यह भी है कि मिस्र में जन्मे एक मौलवी ने गद्दाफी की मौत के लिए फतवा जारी किया है। इमाम युसेफ अल-काराद्वी ने कहा, "मैं गद्दाफी की मौत के लिए फतवा जारी करता हूं।"

इससे पहले मुअम्मार गद्दाफी ने देश से भागने सम्बंधी अफवाहों को खारिज करते हुए मंगलवार को संक्षिप्त अवधि के लिए सरकारी टेलीविजन पर अपनी उपस्थित दर्ज कराई और कहा कि वह त्रिपोली में ही हैं, न कि वेनेजुएला में।

गद्दाफी (68) ने एक युवा सैन्य अधिकारी के रूप में बिना किसी रक्तपात के एक विद्रोह के जरिए सत्ता पर कब्जा जमाया था। वह पिछले 41 वर्षो से सत्ता पर काबिज हैं। पिछले सप्ताह भड़की अशांति के बाद से वह पहली बार टीवी पर नजर आए हैं। वह भी तब जब पिछली रात को सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने सोमवार को कहा था कि गद्दाफी वेनेजुएला चले गए हैं, हालांकि कराकस ने इससे इंकार किया था।

अलजजीरा के अनुसार टीवी पर अपनी 22 सेकंड की उपस्थित के दौरान गद्दाफी एक वैन से बाहर आए और एक छाता खोलकर सिर पर लगाया।

लीबिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन पड़ोसी ट्यूनीशिया व मिस्र में हुई सफल कं्रातियों से प्रेरित है।

ट्यूनीशिया में एक महीने की अशांति के बाद जिने अल-अबीदीन बेन अली के शासन का 14 जनवरी को अंत हो गया था। उसके बाद 25 जनवरी को मिस्र में विरोध प्रदर्शन भड़क उठा। परिणामस्वरूप हुस्नी मुबारक ने 11 फरवरी को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद तो इस पूरे क्षेत्र में अशांति की लहर चल पड़ी है। बहरीन, ईरान, यमन, अल्जीरिया और जोर्डन अशांति की चपेट में हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने अलजजीरा को बताया कि लीबिया में अशांति ने उस समय अचानक हिंसक मोड़ ले लिया, जब सोमवार अपराह्न् एक विशाल जुलूस पर सुरक्षा बलों ने लड़ाकू विमानों से हमला कर दिया।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, "आज हम जिस स्थिति का सामना कर रहे हैं, वह कल्पना से परे है। लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर एक के बाद दूसरे इलाके में अंधाधुंध बम बरसा रहे हैं। इसमें कई लोग मारे गए हैं।"

बीबीसी के एक संवाददाता के मुताबिक गद्दाफी सरकार को कई मोर्चो पर एक साथ लड़ना पड़ रहा है, क्योंकि कई सैन्य इकाइयां गद्दाफी के खिलाफ उठ खड़ी हुई हैं।

अल अरबिया के ऑनलाइन संस्करण ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा है कि सोमवार को लोकतंत्र समर्थकों और गद्दाफी के समर्थकों के बीच हुई झड़पों में 150 से अधिक लोग मारे गए हैं।

मिस्र मूल के एक मौलाना, इमाम यूसुफ अल-करदावी ने भी गद्दाफी की हत्या के लिए फतवा जारी किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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