संयुक्त राष्ट्र 19 भारतीय कम्पनियों को काली सूची से हटाएगा

नई दिल्ली, 22 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र 19 भारतीय कम्पनियों को काली सूची से हटाने के लिए तैयार हो गया है। इनमें सत्यम कम्प्यूटर और टाटा समूह जैसी कम्पनियां है। इन कम्पनियों पर 2008 में संयुक्त राष्ट्र के ठेके के लिए बोली लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

ऑफिस ऑफ सेंट्रल सपोर्ट सर्विसेज में संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव वारेन साच ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता है कि किसी भी प्रतिबंधित भारतीय कम्पनी ने पुनर्बहाली के लिए आवेदन किया है। वे हालांकि पुनर्बहाली के लिए आवेदन किए जाने का स्वागत करेंगे, क्योंकि इससे प्रतियोगिता को बढ़ावा मिलता है।

संयुक्त राष्ट्र के ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र को विभिन्न कम्पनियों ने कुल 13.6 डॉलर मूल्य की सेवाओं की आपूर्ति की। इसमें सर्वाधिक आपूर्ति अमेरिका से हुई। भारत आपूर्ति करने वालों देशों में स्विट्जरलैंड के बाद तीसरा सबसे बड़ा देश था।

भारत की प्रतिबंधित 19 कम्पनियों में से अधिकतर को ईराक के 'भोजन के बदले तेल' कार्यक्रम के तहत प्रतिबंधित किया गया था। सत्यम कम्प्यूटर को 2009 में इसके प्रमुख रामालिंगा राजू द्वारा धांधली करने की बात स्वीकार करने के एक साल बाद गलत दस्तावेजों के लिए लिए प्रतिबंधित किया गया था।

संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने आरोप लगया था कि इराक के भोजन के बदले तेल कार्यक्रम के तहत 1996 से 2003 के बीच 2,253 से अधिक कम्पनियों ने 1.5 अरब डॉलर से अधिक की रिश्वत दी थी।

इन कम्पनियों में से करीब 100 कम्पनियां संयुक्त राष्ट्र की सूची में भी शामिल थीं। इनमें से करीब दर्जन भर भारतीय कम्पनियां थीं, जिनमें टाटा समूह, गोदरेज और बॉयस और किर्लोस्कर समूह भी थे।

साच ने कहा कि यह कहा जा सकता है कि कम्पनियां रिश्वत देने के लिए मजबूर थीं, क्योंकि वहां ठेका हासिल करने के लिए यही शर्त रखी गई थी। शर्तो के मुताबिक ठेका हासिल करने वाली कम्पनियों को अधिक राशि का बिल जमा करना था ताकि अधिकारी अपना हिस्सा भी उसमें से निकाल सकें।

साच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने कम्पनियों की पुनर्बहाली की प्रक्रिया शुरू कर दी है और अब तक पांच-छह कम्पनियों की पुनर्बहाली की जा चुकी है।

पुनर्बहाली के लिए कम्पनियों को किसी तीसरे पक्ष से यह प्रमाणपत्र लेना होगा कि कम्पनी ने भ्रष्टाचार निरोधक कार्यक्रम शुरू किया है और अपनी प्रबंधन व्यवस्था को अधिक चुस्त कर लिया है।

प्रतिबंधित भारतीय कम्पनियों में सत्यम के अलावा पीसीपी इंटरनेशनल और सरकारी दूरसंचार सलाहकार कम्पनी टीसीआईएल भी शामिल है।

पीसीपी और टीसीआईएल को अनुचित लाभ प्रदान करने के मामले में संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त भारतीय अधिकारी संजय बहल को आठ वर्षो के कारावास की सजा सुनाई गई है। उधर सत्यम अब महिंद्रा समूह का हिस्सा हो चुकी है।

साच ने कहा कि वे अधिक-से-अधिक भारतीय कम्पनियों को संयुक्त राष्ट्र के ठेके लिए पंजीकरण करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। संयुक्त राष्ट्र का सम्बंधित विभाग दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरू और मुम्बई में इस मकसद से विभिन्न गोष्ठियां आयोजित कर रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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