स्वेज नहर से गुजरे ईरान के दो जंगी जहाज

वर्ष 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद यह पहला मौका है, जब उसके जंगी जहाजों को स्वेज नहर से गुजरने की अनुमति मिली है। ईरानी नौसेना के अनुसार इसका मकसद अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में दुनिया के विभिन्न देशों के साथ दोस्ताना सम्बंध को मजबूत करना और ईरान की ओर से दुनिया को शांति एवं सुरक्षा का संदेश देना है।

इजरायल ने हालांकि ईरान के इस कदम को 'भड़काऊ' बताया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार स्वेज नजर से गुजरने के लिए ईरान के जंगी जहाजों को मिस्र से मिली अनुमति को इजरायल ने 'गंभीर' कहा है। दोनों देशों में लम्बे समय से कड़वे सम्बंध हैं।

मेहर समाचार एजेंसी ने अल अलाम टीवी के हवाले से खबर दी है कि इनमें एक जहाज का नाम खर्ग है, जिस पर 33,000 टन ईंधन है। दूसरा जहाज अलवंद है, जो 1,500 टन पेट्रोल लेकर यात्रा कर रहा है। खर्ग के चालक दल की संख्या 250 है और यह तीन हेलीकॉप्टरों को ढोने की क्षमता रखता है, जबकि अलवंद टारपीडो और मिसाइलों से लैस है।

बीबीसी ने एक ईरानी अधिकारी के हवाले से कहा है कि उनके जंगी जहाज एक मिशन के तहत सीरिया में प्रशिक्षण के लिए जा रहे हैं। स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर में जाने के लिए ईरान ने मिस्र से पहले ही अनुमति ले ली थी, जिसे इजरायल 'भड़काऊ' कह रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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